कोरबा, 22 जुलाई (वेदांत समाचार)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को कोरबा के सीनियर रिक्रिएशन क्लब (SRC) में ‘प्रोजेक्ट श्वास’ के अंतर्गत AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित मोबाइल मेडिकल यूनिट का शुभारंभ किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने किया।
करीब 4.99 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई यह परियोजना टीबी (क्षय रोग) और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों की समय पर पहचान, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल विशेष रूप से उन गांवों के लिए लाभकारी होगी, जहां आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सीमित है।
प्रोजेक्ट श्वास के तहत अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम से लैस AI-आधारित मोबाइल मेडिकल यूनिट कोरबा, कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्रों के गांवों में नियमित रूप से पहुंचेगी। यहां लोगों की टीबी एवं अन्य फेफड़ों से संबंधित बीमारियों की प्रारंभिक जांच की जाएगी। मरीजों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आगे के उपचार के लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों से भी जोड़ा जाएगा।

यह परियोजना भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme) को भी मजबूती प्रदान करेगी। समय पर जांच और इलाज के माध्यम से टीबी जैसी गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने कहा कि प्रोजेक्ट श्वास के माध्यम से एसईसीएल “रीचिंग द अनरीचेबल” के अपने संकल्प को साकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य दूरस्थ एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिल सके तथा एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण हो।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से मरीजों की शुरुआती स्तर पर पहचान और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन संभव होगा। इससे न केवल टीबी बल्कि अन्य श्वसन रोगों के उपचार में भी तेजी आएगी और गंभीर मामलों को समय रहते अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में कोरबा क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश कुमार गुप्ता, महाप्रबंधक (CSR) अजय बेहरा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस. एन. केशरी, जिला क्षय अधिकारी डॉ. बी. आर. रात्रे, आश्रय फाउंडेशन की प्रतिनिधि सुश्री विदुला चोपड़ा, यूनियन प्रतिनिधियों सहित एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
एसईसीएल की यह नई CSR पहल स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण मानी जा रही है। AI-आधारित मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए दूरस्थ गांवों तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने से टीबी और अन्य श्वसन रोगों की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह पहल खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

