भोपाल, 09 जुलाई । राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को अनिवार्य किया है। बावजूद इसके, मध्य प्रदेश के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेज अब भी आयोग के निर्देशों का पालन नहीं कर पाए हैं। इस पर NMC ने इन संस्थानों को नोटिस जारी करते हुए जल्द से जल्द नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
एनएमसी द्वारा जारी सूची में देशभर के 70 ऐसे मेडिकल कॉलेज शामिल हैं, जिन्होंने अभी तक आयोग के निर्देशानुसार अपने परिसर में सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर उनकी लाइव फीड NMC के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से नहीं जोड़ी है। मध्य प्रदेश से इस सूची में गजराराजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा, डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज, रतलाम, शासकीय मेडिकल कॉलेज, शहडोल और शासकीय मेडिकल कॉलेज, श्योपुर के नाम शामिल हैं।
एनएमसी के अनुसार इन मेडिकल कॉलेजों को पहले भी कई बार निर्देश और रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक आवश्यक व्यवस्था लागू नहीं की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
एनएमसी के यूजीएमएसआर-2023 (UGMSR-2023) और पीजीएमएसआर-2023 (PGMSR-2023) संशोधित नियमों के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज परिसर में 25 निर्धारित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है। इसके साथ ही नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (NVR) के माध्यम से कम से कम 30 दिनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना और कैमरों की लाइव फीड आयोग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ना भी जरूरी है।
आयोग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य एमबीबीएस और पीजी मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना तथा अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2022 से लगातार मेडिकल कॉलेजों और राज्य सरकारों के साथ पत्राचार किया जा रहा है।
एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लांगर ने कहा कि जिन मेडिकल कॉलेजों ने अभी तक व्यवस्था लागू नहीं की है, उन्हें तत्काल आवश्यक सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्थान को तकनीकी सहायता की आवश्यकता है तो वह आयोग को ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकता है। इस संबंध में सभी राज्यों के चिकित्सा शिक्षा सचिवों और संचालकों को भी सूचना भेज दी गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित मेडिकल कॉलेज कितनी जल्द आयोग के निर्देशों का पालन करते हैं और आवश्यक सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित करते हैं।

