सक्ती, 22 जुलाई। वेदांता पावर लिमिटेड के सिंघीतराई (जिला सक्ती) स्थित संयंत्र में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट की जांच प्रक्रिया को लेकर आईएनटीयूसी के जिला अध्यक्ष एवं ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) के सदस्य शशांक दुबे ने राज्य सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के तीन माह बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है तथा जांच प्रक्रिया में गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में शशांक दुबे ने कहा कि इस हादसे में 25 से अधिक श्रमिकों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आधार पर आयुक्त, बिलासपुर संभाग ने 20 अप्रैल 2026 को दुर्घटना की जांच प्रारंभ की थी और संबंधित विभागों व वेदांता प्रबंधन को जांच में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीजी पोर्टल) में दर्ज उनकी शिकायत को सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टर सक्ती को भेज दिया, जहां से उसे एसडीएम डभरा को अग्रेषित किया गया। एसडीएम के 13 जुलाई 2026 के पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि दुर्घटना की जांच आयुक्त, बिलासपुर संभाग द्वारा की जा रही है तथा उनके स्तर पर कोई कार्रवाई पूर्ण नहीं हुई है।
शशांक दुबे ने सवाल उठाया कि जब जांच का दायित्व आयुक्त, बिलासपुर संभाग को सौंपा गया था, तब शिकायत कलेक्टर और एसडीएम को क्यों भेजी गई। उन्होंने यह भी पूछा कि इस मामले की वास्तविक मजिस्ट्रियल जांच किस स्तर पर की जा रही है और राज्य सरकार इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
उन्होंने मांग की कि यह भी सार्वजनिक किया जाए कि जांच के दौरान वेदांता प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी, कारखाना अधिभोगी और फैक्ट्री प्रबंधक जांच के समक्ष उपस्थित हुए या नहीं। यदि उपस्थित नहीं हुए तो उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। साथ ही उन्होंने पूछा कि एफआईआर दर्ज होने के तीन माह बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई तथा आयुक्त, कलेक्टर, मुख्य कारखाना निरीक्षक और मुख्य बॉयलर निरीक्षक की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
शशांक दुबे ने कहा कि यह मामला केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा, उनके जीवन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि सभी जांच रिपोर्टें तत्काल सार्वजनिक कर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

