मेजर ध्यानचंद के परिवार से जुड़े व्यवसायी से 40 लाख की बैंकिंग ठगी, RTGS फॉर्म में हेराफेरी कर रकम उड़ाने वाला अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार - vedantsamachar.in

मेजर ध्यानचंद के परिवार से जुड़े व्यवसायी से 40 लाख की बैंकिंग ठगी, RTGS फॉर्म में हेराफेरी कर रकम उड़ाने वाला अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार

झांसी। देश के महान हॉकी खिलाड़ी और ‘हॉकी के जादूगर’ के नाम से प्रसिद्ध Major Dhyan Chand के परिवार से जुड़े एक बड़े व्यवसायी के साथ 40 लाख रुपये की बैंकिंग ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल बैंकिंग फ्रॉड में एक शातिर आरोपी ने RTGS फॉर्म में हेराफेरी कर लाखों रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। मामले का खुलासा होने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, व्यवसायी द्वारा एक बड़ी राशि भारत पेट्रोलियम के खाते में RTGS के माध्यम से भेजी जानी थी। इसके लिए बैंक में विधिवत RTGS फॉर्म जमा किया गया था। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी राशि संबंधित खाते में नहीं पहुंची। जब इसकी जांच की गई तो एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया।

जांच में पता चला कि आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से असली RTGS फॉर्म से हस्ताक्षर वाला हिस्सा काटकर उसे दूसरे फॉर्म पर चिपका दिया था। इसके बाद फर्जी दस्तावेज के आधार पर करीब 40 लाख रुपये की रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। पहली नजर में दस्तावेज पूरी तरह असली प्रतीत हो रहे थे, जिसके कारण धोखाधड़ी का पता तुरंत नहीं चल सका।

घटना की जानकारी मिलते ही झांसी पुलिस और बैंक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की तलाश तेज कर दी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते महज 24 घंटे के भीतर पश्चिम बंगाल निवासी एक अंतरराज्यीय ठग को झांसी रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से देश के विभिन्न हिस्सों में बैंकों की रेकी करता था। वह बैंक शाखाओं में आने वाले ग्राहकों के चेक, RTGS फॉर्म और अन्य वित्तीय दस्तावेजों पर नजर रखता था। मौका मिलने पर वह दस्तावेजों में हेराफेरी कर फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी खातों के माध्यम से रकम ट्रांसफर करवा लेता था।

पुलिस ने आरोपी के बैंक खातों में मौजूद करीब 37 लाख रुपये की राशि को फ्रीज करा दिया है, जिससे पीड़ित को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा आरोपी के कब्जे से नकदी, सोने के गहने, डेबिट कार्ड, चेकबुक, मोबाइल फोन तथा कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल आरोपी ने सोने के आभूषण खरीदने में किया था। पुलिस के अनुसार, उसने कुछ नामी ज्वैलर्स से महंगे गहने खरीदे थे, जिनकी भी जांच की जा रही है। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।

फिलहाल झांसी पुलिस आरोपी के संभावित साथियों, बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और देश के विभिन्न राज्यों में हुई समान घटनाओं की कड़ियों को खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ और डिजिटल जांच के बाद इस अंतरराज्यीय ठगी गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर बैंकिंग लेनदेन के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े वित्तीय लेनदेन करते समय ग्राहकों को दस्तावेजों की सुरक्षा, ट्रांजेक्शन की नियमित निगरानी और बैंक से तत्काल पुष्टि जैसी सावधानियां अपनानी चाहिए, ताकि इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।