इंदौर। मध्यप्रदेश में एमबीबीएस प्रवेश (MBBS Admission) प्रक्रिया के पहले चरण की सीट अलॉटमेंट सूची जारी होते ही इंदौर के मेडिकल कॉलेजों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (डीटीई) की ओर से जारी फर्स्ट राउंड काउंसलिंग में सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर छात्रों की पहली पसंद एक बार फिर भारी पड़ी, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों को उम्मीद के मुताबिक सीटें नहीं मिल सकीं। स्थिति यह रही कि कई निजी कॉलेजों में आधे से ज्यादा सीटें खाली रह गईं।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सभी सीटें भर गईं
इंदौर के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (MGM) और इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (IIPS) की सभी एमबीबीएस सीटों पर पहले ही राउंड में 100 प्रतिशत अलॉटमेंट हो गया। दोनों संस्थानों की 135-135 सीटें पूरी तरह भर गईं। इससे साफ है कि प्रदेशभर के मेधावी छात्रों की पहली पसंद अब भी सरकारी मेडिकल कॉलेज ही बने हुए हैं।
निजी कॉलेजों में नहीं दिखा छात्रों का उत्साह
पहले राउंड के नतीजों ने निजी मेडिकल कॉलेजों की चिंता बढ़ा दी है। इंदौर के आधे से अधिक निजी मेडिकल कॉलेज पहले चरण में अपना सीट खाता तक नहीं खोल सके। जिन कॉलेजों में कुछ सीटें भरी भी हैं, वहां केवल एक-दो छात्रों को ही प्रवेश मिला है। इससे निजी संस्थानों को अब दूसरे राउंड की काउंसलिंग से काफी उम्मीदें हैं।
इंदौर में मेडिकल सीटों की स्थिति
- 72 मेडिकल मैनेजमेंट कॉलेज/संस्थान
- 15 हजार एमबीबीएस की कुल सीटें (रिपोर्ट के अनुसार)
- 19 स्पेशलाइजेशन उपलब्ध
पहले राउंड में सिर्फ टॉप स्कोर वालों को मिला मौका
डीटीई के पहले चरण की काउंसलिंग में केवल उन्हीं विद्यार्थियों को चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट का मौका मिला, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा (कॉमन मेरिट) में बेहतर प्रदर्शन किया। मेरिट अधिक होने के कारण छात्रों का पूरा फोकस सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर रहा। यही वजह रही कि निजी कॉलेजों की अधिकांश सीटें खाली रह गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले राउंड में जिन छात्रों को सरकारी कॉलेज मिल गए हैं, उनमें से अधिकांश 24 जुलाई तक रिपोर्टिंग पूरी कर देंगे। अनुमान है कि पहले राउंड में अलॉट हुई 90 प्रतिशत से अधिक सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
अब दूसरे राउंड पर टिकी उम्मीदें
पहले राउंड के बाद अब खाली बची निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटों को भरने के लिए दूसरा चरण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरे राउंड के लिए:
- 26 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन किए जा सकेंगे।
- 30 जुलाई तक चॉइस फिलिंग होगी।
- इसके बाद संशोधित मेरिट के आधार पर 4 अगस्त को दूसरे चरण का सीट अलॉटमेंट जारी किया जाएगा।
छात्रों के लिए क्या है अहम?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे राउंड में ऐसे विद्यार्थियों को भी अवसर मिलेगा, जिन्होंने पहले चरण में भाग नहीं लिया था या अपनी पसंद के कॉलेज नहीं मिलने के कारण एडमिशन नहीं लिया। ऐसे में निजी मेडिकल कॉलेजों में इस बार सीटें भरने की संभावना पहले राउंड की तुलना में अधिक मानी जा रही है। पहले राउंड के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर फीस, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत शैक्षणिक प्रतिष्ठा के कारण सरकारी मेडिकल कॉलेज अब भी विद्यार्थियों की पहली पसंद बने हुए हैं, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों को छात्रों को आकर्षित करने के लिए दूसरे राउंड का इंतजार करना पड़ रहा है।

