बिलासपुर, 19 अप्रैल (वेदांत समाचार): बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के करोड़ों रुपए के निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। इसकी जांच के लिए रायपुर से अफसरों की टीम बिलासपुर पहुंची। जांच अधिकारी ने सेंट्रल जेल के साथ ही नेहरु चौक से दर्रीघाट सड़क और एडवोकेट हॉल प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। साथ ही गुणवत्ता परखने के लिए सैंपल भी लिए।
बिलासपुर के बैमा में नई केंद्रीय जेल का निर्माण होना है। साल 2022 से प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया। पिछले साल मां भगवती कंस्ट्रक्शन को टेंडर मिला था, लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ी की शिकायत पर टेंडर निरस्त कर दिया गया। जबकि फर्म ने मौके पर काम शुरू कर दिया था। इसके बाद सातवें टेंडर में नए फर्म बालाजी इंजीकॉम को टेंडर जारी किया गया है। इस फर्म के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। वहीं, विभाग के जिम्मेदार अफसरों के मनमाने ढंग से काम करने के कारण शासन को 9 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। जबकि, नए टेंडर में भी अफसरों की भूमिका संदेहास्पद है।
नए फर्म के दो कामों के दस्तावेजों में 700 करोड़ रुपए का अंतर है। यही वजह है कि जिले में चल रहे विभाग के निर्माण कार्यों की निगरानी की जा रही है। जांच अधिकारी ने केंद्रीय जेल, नेहरू चौक से दर्रीघाट रोड और एडवोकेट हॉल प्रोजेक्ट की बारीकी से जांच की। जांच अधिकारी विशाल त्रिवेदी ने सबसे पहले बैमा नगोई स्थित केंद्रीय जेल का दौरा किया। यहां निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल लिए गए। उनके साथ चीफ इंजीनियर आरके रात्रे, एसई केपी संत समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इसके बाद टीम ने 32 करोड़ रुपए के नेहरू चौक से दर्रीघाट रोड प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान डामरीकरण और लालखदान क्षेत्र में चल रहे काम को देखा गया। टीम ने एडवोकेट हॉल निर्माण का भी जायजा लिया।
माना जा रहा है कि जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट रायपुर में इंजीनियर इन चीफ को सौंपेंगे। हालांकि, पीडब्ल्यूडी के अफसरों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स की समय-समय पर रूटीन जांच की जा रही है। जांच में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं मिली है।
