कोरबा, 15 जुलाई । जिले के दादरखुर्द में भगवान जगन्नाथ की 125 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष 16 जुलाई को श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली जाएगी। कोरबा की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल इस रथयात्रा को लेकर मंदिर समिति, प्रशासन और स्थानीय श्रद्धालुओं ने सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहेगा।
दादरखुर्द स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह है। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और रोशनी से सजाया जा रहा है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र तथा बहन देवी सुभद्रा के दिव्य श्रृंगार एवं विशेष पूजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पुजारी एवं सेवायत पिछले कई दिनों से धार्मिक अनुष्ठानों में जुटे हुए हैं।

16 जुलाई की सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को पारंपरिक विधि-विधान के साथ भव्य रथ पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद “जय जगन्नाथ” के जयघोष के बीच रथयात्रा नगर भ्रमण के लिए रवाना होगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और रथ की रस्सी खींचने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मंदिर के मुख्य पुजारी कुंज द्विवेदी ने बताया कि दादरखुर्द की रथयात्रा पिछले 125 वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है और यह कोरबा जिले की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में से एक है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ को “जगत के नाथ” अर्थात समस्त सृष्टि का पालनहार माना जाता है। उनकी विशाल नेत्र सभी जाति, वर्ग और समुदाय के लोगों के प्रति समान दृष्टि और समरसता का संदेश देते हैं। यही कारण है कि यह रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और लोककल्याण का भी प्रतीक मानी जाती है।
रथयात्रा के सफल एवं सुरक्षित आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर समिति के समन्वय से पुलिस विभाग, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा तथा अन्य आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से महापर्व में शामिल हो सकें।

