SECL की सीएसआर पहल: ग्राम बोड्डीहा के तालाब पर बने दो पक्के घाट, ग्रामीणों को मिलेगी सुरक्षित और सुगम सुविधा - vedantsamachar.in

SECL की सीएसआर पहल: ग्राम बोड्डीहा के तालाब पर बने दो पक्के घाट, ग्रामीणों को मिलेगी सुरक्षित और सुगम सुविधा

शहडोल, 15 जुलाई (वेदांत समाचार)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के सोहागपुर क्षेत्र ने अपनी निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्राम पंचायत धिरौल के ग्राम बोड्डीहा स्थित तालाब पर दो पक्के घाटों का निर्माण कराया है। अमलाई ओसीएम परियोजना के समीप स्थित इस गांव में किए गए इस विकास कार्य से ग्रामीणों को तालाब तक सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध होगी।

एसईसीएल द्वारा कराए गए इस कार्य में तालाब के दोनों किनारों पर मजबूत पक्के घाटों का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही तालाब के तटों का स्लोप प्रोटेक्शन (तट सुदृढ़ीकरण) भी कराया गया है, जिससे मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ-साथ तालाब के किनारों को सुरक्षित और स्थायी बनाया जा सके।

ग्रामीणों के लिए यह परियोजना कई मायनों में लाभकारी साबित होगी। अब धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, स्नान, दैनिक उपयोग और अन्य सामाजिक गतिविधियों के दौरान तालाब तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित होगा। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

यह परियोजना केवल आधारभूत सुविधाओं के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा देती है। तालाब के तटों का सुदृढ़ीकरण होने से जलाशय का संरक्षण होगा, मिट्टी का कटाव कम होगा और जल स्रोत की दीर्घकालिक उपयोगिता बनी रहेगी। इससे क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

एसईसीएल लगातार अपनी सीएसआर योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आधारभूत ढांचे और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। ग्राम बोड्डीहा में तालाब पर पक्के घाटों का निर्माण भी इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाना और ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करना है।

इस विकास कार्य से ग्राम बोड्डीहा के लोगों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि पक्के घाट बनने से वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है और अब तालाब का उपयोग अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।