श्मशान घाट के अभाव में तालाब किनारे हुआ अंतिम संस्कार: जिला मुख्यालय से 5 किमी दूर कोतमरा में ग्रामीणों ने उठाए विकास पर सवाल - vedantsamachar.in

श्मशान घाट के अभाव में तालाब किनारे हुआ अंतिम संस्कार: जिला मुख्यालय से 5 किमी दूर कोतमरा में ग्रामीणों ने उठाए विकास पर सवाल

राजेश यादव सारंगढ़,03 जुलाई 2026। जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कोतमरा में मूलभूत सुविधाओं की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। गांव में श्मशान घाट (मुक्तिधाम) नहीं होने के कारण ग्रामीणों को एक मृतक का अंतिम संस्कार तालाब किनारे करना पड़ा। लगातार हो रही बारिश के बीच अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना परिजनों और ग्रामीणों के लिए बेहद कठिन रहा। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने पंचायत और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार, कोतमरा निवासी राजकुमार वारे का निधन हो गया। गांव में मुक्तिधाम नहीं होने के कारण परिजन और ग्रामीण मजबूरी में तालाब किनारे अंतिम संस्कार करने पहुंचे। बारिश के बीच अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई, जिससे मृतक के परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा मिलना उसका मूल अधिकार है, लेकिन कोतमरा के लोगों को आज भी इस बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को सड़क, पेयजल, बिजली, मुक्तिधाम सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत हर वर्ष लाखों रुपये उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद आज तक गांव में मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि यह प्रशासनिक उदासीनता और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को दर्शाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान भी उन्होंने गांव में मुक्तिधाम निर्माण की मांग प्रशासन के समक्ष रखी थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच राजकुमार वारे के निधन के बाद श्मशान घाट के अभाव की समस्या एक बार फिर सामने आ गई।

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि ग्राम पंचायत कोतमरा में शीघ्र मुक्तिधाम का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील घड़ी में इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। साथ ही गांव में अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के विकास पर भी प्राथमिकता से ध्यान दिया जाए।