खरीफ 2026 को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की हाई लेवल बैठक, संभावित अल्प वर्षा से निपटने की पूरी तैयारी; किसानों के लिए 46 हजार टन से अधिक DAP उपलब्ध - vedantsamachar.in

खरीफ 2026 को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की हाई लेवल बैठक, संभावित अल्प वर्षा से निपटने की पूरी तैयारी; किसानों के लिए 46 हजार टन से अधिक DAP उपलब्ध

रायपुर, 03 जुलाई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन-2026 और संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में कृषि विभाग, विकसित भारत वीबी-जी राम जी योजना तथा मौसम और ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों के साथ खाद-बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, ग्रामीण रोजगार और किसानों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखी जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद, बीज, तकनीकी सलाह और अन्य आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से छत्तीसगढ़ के किसानों की जरूरत के अनुसार अतिरिक्त डीएपी (DAP) उर्वरक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप प्रदेश को 46 हजार टन से अधिक डीएपी उर्वरक की आपूर्ति मिली है, जो सामान्य से अधिक है। इससे किसानों को खरीफ सीजन में उर्वरक की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने धान की खेती के लिए सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके। उन्होंने जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने पर जोर देते हुए ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। खेत तालाब, वर्षा जल संरक्षण, जल संरचनाओं के निर्माण और भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए।

उन्होंने कृषि विभाग को कम और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण और आधुनिक वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। साथ ही ऊंची भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा, ताकि किसानों की आय बढ़े और कृषि जोखिम कम हो।

मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे खेती से जुड़ी किसी भी समस्या या तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों और कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें। उन्होंने अमानक बीज और उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में खाद और बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था कर ली गई है। बीज निगम के माध्यम से अर्ली वेरायटी के धान बीज उपलब्ध कराने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।

मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए ‘सचेत’, ‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ मोबाइल ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए ताकि किसानों को समय पर मौसम संबंधी जानकारी मिल सके। इसके अलावा सहकारी समितियों के माध्यम से उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।

बैठक में वीबी-जी राम जी योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि योजना का क्रियान्वयन 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है। इसके तहत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाएगी। योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल संरचनाओं के निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ऐसे कार्य किए जाएं जिनसे ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ-साथ प्रदेश की जल सुरक्षा भी मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में किया गया प्रत्येक प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य निवेश साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए जाने वाले कृषि बुलेटिनों के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित सभी माध्यमों से किसानों तक मौसम, खेती और नई तकनीकों की जानकारी समय पर पहुंचाई जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, कृषि संचालक राहुल देव, विकसित भारत वीबी-जी राम जी योजना के आयुक्त तारणप्रकाश सिन्हा, भारत मौसम विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ गायत्री वानी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के निदेशक विवेक कुमार त्रिपाठी सहित कृषि, मौसम और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।