वैभव सूर्यवंशी पर सिर्फ प्रचार या भरोसा भी? 15 साल के युवा को 3 मैच में नहीं मिला मौका... - vedantsamachar.in

वैभव सूर्यवंशी पर सिर्फ प्रचार या भरोसा भी? 15 साल के युवा को 3 मैच में नहीं मिला मौका…

नई दिल्ली,03 जुलाई। 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य बताकर टीम इंडिया में शामिल किया गया, लेकिन तीन मैच बीत जाने के बाद भी उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला। पहले आयरलैंड के खिलाफ दो मुकाबलों और फिर इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में भी वह बेंच पर ही बैठे रहे। अब टीम मैनेजमेंट और चयन नीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि यदि युवा खिलाड़ी को अभी नहीं खिलाना था, तो इतनी जल्दी टीम में चयन क्यों किया गया?

वैभव को लेकर टीम इंडिया के आधिकारिक प्रसारण में भी बड़े स्तर पर प्रचार किया गया। उन्हें सीरीज का सबसे चर्चित चेहरा बनाया गया, लेकिन मैदान पर उतरने का अवसर नहीं मिला। इससे क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय टीम अपने चुने हुए युवा खिलाड़ियों पर वास्तव में भरोसा करती है या सिर्फ भविष्य के नाम पर उन्हें सुर्खियों तक सीमित रखती है।

टीम मैनेजमेंट का तर्क हो सकता है कि 15 साल के खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जल्दबाजी में उतारना उचित नहीं होगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फिलहाल उन्हें मौका देने की योजना नहीं थी, तो चयन भी कुछ समय बाद किया जा सकता था। दूसरी ओर, इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में भारतीय बल्लेबाज सीम और उछाल भरी गेंदों के सामने संघर्ष करते नजर आए, फिर भी टीम संयोजन में कोई बदलाव नहीं किया गया।

पूर्व बीसीसीआई चयनकर्ता सरनदीप सिंह ने रोटेशन पॉलिसी का समर्थन करते हुए कहा है कि भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने के लिए समय-समय पर युवा खिलाड़ियों को अवसर देना जरूरी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2012 की कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज में भी महेंद्र सिंह धोनी ने सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे दिग्गजों को रोटेशन का हिस्सा बनाकर रोहित शर्मा जैसे युवाओं को मौका दिया था, जिसका फायदा भारतीय क्रिकेट को आगे चलकर मिला।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलते ही भारत हर मैच जीत जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा। लेकिन लगातार बेंच पर बैठाए रखना भी उनके विकास के लिए उचित नहीं माना जा सकता। अब निगाहें मुख्य कोच गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट पर हैं कि वे सिर्फ मौजूदा मैचों की रणनीति पर ध्यान देंगे या आने वाले वर्षों के लिए टीम तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाएंगे।