कार की कीमत 8 लाख, लेकिन बिल 10 लाख का! जानिए एक्स-शोरूम और ऑन-रोड प्राइस के बीच का पूरा खेल - vedantsamachar.in

कार की कीमत 8 लाख, लेकिन बिल 10 लाख का! जानिए एक्स-शोरूम और ऑन-रोड प्राइस के बीच का पूरा खेल

नई कार या बाइक खरीदना हर किसी का सपना होता है. लेकिन जब लोग शोरूम में गाड़ी खरीदने जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि विज्ञापन में दिखाई गई कीमत और असली भुगतान की रकम अलग होती है. यही वजह है कि कई बार लोगों का बजट बिगड़ जाता है। इसका कारण एक्स-शोरूम और ऑन-रोड कीमत के बीच का अंतर है.

क्या होती है एक्स-शोरूम कीमत
एक्स-शोरूम कीमत वह होती है जो कंपनी गाड़ी की मूल कीमत के रूप में बताती है. इसमें गाड़ी की कीमत, डीलर का मुनाफा और जीएसटी शामिल होता है. लेकिन इस कीमत पर गाड़ी सीधे सड़क पर नहीं चल सकती. इसके लिए कुछ जरूरी शुल्क और टैक्स देने पड़ते हैं, जो मिलकर ऑन-रोड कीमत बनाते हैं.

रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन
सबसे बड़ा खर्च रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन का होता है. हर राज्य अपनी तरफ से रोड टैक्स लेता है. यह टैक्स गाड़ी की कीमत, इंजन की ताकत और ईंधन के प्रकार के हिसाब से तय किया जाता है. इसके साथ गाड़ी का रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट का खर्च भी जुड़ जाता है.

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस
इसके बाद आता है बीमा का खर्च. भारत में बिना बीमा के गाड़ी चलाना नियमों के खिलाफ है. नई कार खरीदने पर 3 साल और दोपहिया वाहन खरीदने पर 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना जरूरी होता है. कई लोग अपनी गाड़ी की ज्यादा सुरक्षा के लिए पूरा बीमा भी करवाते हैं, जिससे कुल कीमत और बढ़ जाती है.अगर किसी गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उस पर 1 प्रतिशत टीसीएस भी देना पड़ता है. यह रकम बाद में आयकर रिटर्न भरते समय वापस समायोजित की जा सकती है, लेकिन खरीदते समय इसे देना जरूरी होता है.

फास्टैग की फीस
इसके अलावा फास्टैग का शुल्क भी लिया जाता है, जिससे हाईवे पर टोल का भुगतान आसान हो जाता है. कुछ राज्यों में खासकर डीजल गाड़ियों पर अतिरिक्त ग्रीन टैक्स भी लगाया जाता है.गाड़ी खरीदते समय डीलर कुछ ऐसे खर्च भी जोड़ सकते हैं जो जरूरी नहीं होते. जैसे एक्सेसरीज पैक, एक्सटेंडेड वारंटी या अन्य अतिरिक्त सुविधाएं.

अगर आप इन्हें नहीं लेना चाहते, तो मना कर सकते हैं. इसलिए फाइनल बिल को ध्यान से जांचना बहुत जरूरी है.नई गाड़ी खरीदने से पहले हमेशा ऑन-रोड कीमत जरूर पूछें. इससे आपको सही बजट का अंदाजा रहेगा और बाद में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.