पाकिस्तान से बातचीत पर आरएसएस का रुख साफ,मोहन भागवत बोले- जनता से संवाद जरूरी - vedantsamachar.in

पाकिस्तान से बातचीत पर आरएसएस का रुख साफ,मोहन भागवत बोले- जनता से संवाद जरूरी

तिरुअंतपुरम,14जून।मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सरकार पर संघ का रुख केंद्र सरकार की नीति के ही समान है, लेकिन उन्होंने वहां की आम जनता के साथ बातचीत की वकालत की। भागवत के अनुसार, पाकिस्तान में कई लोग टू-नेशन थ्योरी के खिलाफ हैं और मानते हैं कि विभाजन एक ऐतिहासिक भूल थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। केरल के तिरुवनंतपुरम में संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान की सरकार को लेकर संघ का रुख बिल्कुल वही रहेगा, जो भारत सरकार की आधिकारिक नीति है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वहां के आम नागरिकों के साथ बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले रहने चाहिए।

दत्तात्रेय होसबाले के बयान का किया समर्थन

मोहन भागवत ने हाल ही में संघ के सीनियर पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत की खिड़की खुली रखने की वकालत की थी। भागवत ने स्पष्ट किया कि होसबाले का इशारा पाकिस्तान की सत्ता या सरकार की तरफ नहीं था, बल्कि वे वहां की आम जनता के साथ संवाद की बात कर रहे थे।

पाकिस्तान में एक वर्ग विभाजन को गलत मानता है

आरएसएस प्रमुख ने एक दिलचस्प बात साझा करते हुए कहा कि पाकिस्तान में आज भी ऐसे कई लोग मौजूद हैं, जो दिल से मानते हैं कि भारत का बटवारा एक बहुत बड़ी गलती थी। वहां के कई पत्रकार और आम नागरिक संघ के काम की तारीफ भी करते हैं। पाकिस्तान के अंदर अब एक ऐसा बड़ा वर्ग तैयार हो रहा है, जो ‘टू-नेशन थ्योरी’ के खिलाफ है और जिसका मानना है कि दोनों देशों का एक साथ मिलकर रहना कहीं ज्यादा बेहतर था।

हम हिटलर नहीं हैं

भारत के पारंपरिक और मानवीय मूल्यों का हवाला देते हुए मोहन भागवत ने कहा, “हम हिटलर की तरह क्रूर नहीं हैं, यह हमारा स्वभाव और हमारी संस्कृति नहीं है। अगर भविष्य में हम अन्याय और अत्याचार को पूरी तरह हरा भी देते हैं, तब भी हमें वहां के अच्छे लोगों को संभालना होगा। या तो उन्हें मुख्यधारा में शामिल करना होगा या फिर उन्हें शांति से जीने का मौका देना होगा। इसके लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना बेहद जरूरी है।” उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि विदेश नीति को लेकर आरएसएस की कोई अलग लाइन नहीं है और संघ पूरी तरह से केंद्र सरकार के फैसलों के साथ खड़ा है। इस बयान से स्पष्ट है कि संघ आतंकवाद के खिलाफ सख्त है, लेकिन आम नागरिकों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखने का पक्षधर है।