रायगढ़, 11 जून 2026 (वेदांत समाचार)। रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में महिला की गरिमा भंग करने, अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देने और छेड़खानी के पांच साल पुराने मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी घरघोड़ा की अदालत ने आरोपियों को 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी तरुण कुमार साहू, छबिलाल साहू और उग्रसेन साहू को महिला की गरिमा भंग करने और अश्लील वीडियो बनाकर धमकी देने के अपराध में दोषसिद्ध पाया। यह फैसला महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर न्यायालय की सख्त सोच और प्रभावी पुलिस विवेचना का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
घटना 14 अक्टूबर 2020 की है। पीड़िता अपने मंगेतर के साथ मोटरसाइकिल से बंजारी मंदिर, तराईमाल दर्शन के लिए गई थी। मंदिर से लौटते समय गोदगोदा नाला घाट के पास पीड़िता दिशा मैदान के लिए नाले की ओर गई थी। इसी दौरान तीनों आरोपी वहां पहुंचे और पीड़िता तथा उसके मंगेतर के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपियों ने दोनों के कपड़े उतरवाए और अश्लील फोटो तथा वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी दी। साथ ही उनसे पैसों की मांग भी की गई।
घटना के बाद 23 अक्टूबर 2020 को पीड़िता ने पूंजीपथरा थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना तत्कालीन उप निरीक्षक गिरधारी साव ने की। जांच के दौरान पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी बरामद किए।
मोबाइल फोन की वैज्ञानिक जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि आरोपियों ने पीड़िता के अश्लील वीडियो और फोटो बनाए थे। पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सत्यनारायण महिलाने ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय में पीड़िता, उसके मंगेतर सहित कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और 16 दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए अश्लील वीडियो और फोटो तैयार किए तथा उन्हें वायरल करने की धमकी दी। इसके आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354-क, 354-ग और 509-क के तहत तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। न्यायालय ने धारा 354-क एवं 354-ग के तहत 3-3 वर्ष तथा धारा 509-क के तहत 1-1 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई। हालांकि, लूटपाट से संबंधित आरोपों को अभियोजन पक्ष न्यायालय में सिद्ध नहीं कर सका।
इस मामले में रायगढ़ पुलिस की विवेचना और अभियोजन पक्ष की पैरवी को न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के खिलाफ अपराध करने वालों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस सशक्त जांच कर दोषियों को कठोर सजा दिलाने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।

