“मैं चाहती हूँ कि दर्शक कुंती को सिर्फ एक पौराणिक किरदार के रूप में नहीं, बल्कि एक महिला और माँ के रूप में भी देखें”: तोरल रसपुत्रा - vedantsamachar.in

“मैं चाहती हूँ कि दर्शक कुंती को सिर्फ एक पौराणिक किरदार के रूप में नहीं, बल्कि एक महिला और माँ के रूप में भी देखें”: तोरल रसपुत्रा

मुंबई, 11 जून, 2026: सोनी सब का नया भव्य शो हस्तिनापुर के वीर पांडवों और कौरवों के अनकहे शुरुआती वर्षों को जीवंत करता है। इसमें उनके रिश्ते, परवरिश और महत्वाकांक्षाएँ शामिल हैं, जिन्होंने हस्तिनापुर की किस्मत तय की। इस महाकाव्य कथा के केंद्र में है कुंती, जिसे तोरल रसपुत्रा निभा रही हैं। कुंती, जिनके फैसले, त्याग और अडिग शक्ति पांडवों की विरासत की नींव बने। तोरल, जो स्क्रीन पर मजबूत और यादगार महिलाओं के किरदारों के लिए जानी जाती हैं, अब अपने सबसे परतदार किरदार को निभा रही हैं। कुंती एक ऐसी महिला है, जिसकी सोच और प्रभाव ने इतिहास की दिशा बदल दी।

एक खुली बातचीत में उन्होंने बताया कि कुंती का किरदार निभाते हुए उनका भावनात्मक और मानसिक सफर कैसा रहा, तैयारी के दौरान उन्होंने इस प्रतिष्ठित किरदार के बारे में क्या सीखा और दर्शक आने वाले एपिसोड्स में क्या देख सकते हैं।

जब आपने कहानी और अपने किरदार के बारे में पहली बार सुना तो आपकी प्रतिक्रिया क्या थी?
मेरी पहली प्रतिक्रिया उत्साह और ज़िम्मेदारी का मिश्रण थी। कुंती भारतीय पौराणिक कथाओं की सबसे सम्मानित और जटिल पात्रों में से एक हैं। जब मैंने उनकी यात्रा और कहानी की भावनात्मक गहराई के बारे में सुना, तो मुझे लगा कि यह चुनौतीपूर्ण लेकिन बेहद संतोषजनक भूमिका होगी।


आपने अक्सर मजबूत और यादगार महिलाओं के किरदार निभाए हैं। यह भूमिका उनसे कैसे अलग है? हालाँकि, मैंने पहले भी मजबूत किरदार निभाए हैं, लेकिन कुंती की ताक़त एक अलग जगह से आती है। वे सिर्फ माँ ही नहीं, बल्कि बुद्धि, त्याग और धैर्य की प्रतीक हैं। उनका जीवन कर्तव्य, भावनाओं और नैतिकता के बीच संघर्ष को दर्शाता है और उनका किरदार साहस का महत्व सिखाता है। उनकी दृढ़ता शांत है, लेकिन बेहद प्रभावशाली, जो उन्हें खास बनाती है।


इस भूमिका की तैयारी आपने कैसे की? क्या इसके लिए विशेष रिसर्च या ट्रेनिंग की ज़रूरत थी?
मैं लगातार कुंती के जीवन के बारे में पढ़ती रही और उनकी भावनात्मक यात्रा को समझने की कोशिश करती रही। जैसा कि मैंने कहा, यह बहुत जटिल किरदार है– मजबूत, बुद्धिमान और फिर भी बेहद मानवीय। मैं उनकी ताकत, गरिमा और आंतरिक संघर्ष को सच्चाई से दिखाने पर काम कर रही हूँ। निर्देशक और क्रिएटिव टीम के साथ लगातार चर्चा करती हूँ, ताकि उनकी दृष्टि से मेल खा सकूँ। तैयारी ज़्यादा भावनात्मक और मानसिक रही है, शारीरिक नहीं।


तैयारी के दौरान क्या ऐसा कुछ मिला जिसने आपके नजरिए को बदल दिया?
सबसे ज़्यादा मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि वे कितनी मानवीय हैं। हम अक्सर पौराणिक पात्रों को बहुत बड़ा मानते हैं, लेकिन कुंती ने भी किसी आम इंसान की तरह संदेह और डर का सामना किया। उनकी कमजोरियों को समझने से मुझे उनसे और गहराई से जुड़ने का मौका मिला।


कुंती की कौन-सी कम जानी जाने वाली खूबियाँ दर्शक इस शो में देख पाएँगे?
दर्शक उनकी बुद्धिमत्ता, भावनात्मक समझ और आंतरिक संघर्ष को और करीब से देख पाएँगे। पांडवों की माँ होने से आगे बढ़कर वह एक रणनीतिकार, मार्गदर्शक और ऐसी महिला थीं जिन्होंने हमेशा अपने परिवार की भलाई को अपनी खुशी से ऊपर रखा।
कुंती और पांडवों का रिश्ता कहानी का केंद्र है। आपने युवा कलाकारों के साथ यह केमिस्ट्री कैसे बनाई? सभी कलाकार बेहद प्रतिभाशाली और मेहनती हैं। वे अपने काम को अच्छी तरह जानते हैं। हमने शूटिंग शुरू करने से पहले वर्कशॉप्स कीं और अपने किरदारों के रिश्तों पर लंबी बातचीत की। उस तैयारी ने बहुत फर्क डाला।


दर्शक ऑन-स्क्रीन हस्तिनापुर की भव्यता और गंभीरता देखते हैं। कैमरे बंद होने पर माहौल कैसा होता है?
असल में माहौल बहुत गर्मजोशी और जीवंत होता है। गहन दृश्यों के बावजूद सेट पर हँसी-मज़ाक, दोस्ताना बातचीत और आपसी सहयोग रहता है। सब मेहनत करते हैं लेकिन साथ ही प्रक्रिया का आनंद भी लेते हैं।


बिना ज़्यादा खुलासा किए, दर्शक आने वाले एपिसोड्स में कुंती की यात्रा से क्या उम्मीद कर सकते हैं?
दर्शक एक भावनात्मक और प्रेरणादायक यात्रा देखेंगे। कुंती कठिन चुनौतियों का सामना करेंगी, जो उनकी ताकत, बुद्धि और धैर्य की परीक्षा लेंगी। मुझे विश्वास है कि दर्शक कुंती को सिर्फ एक पौराणिक किरदार नहीं, बल्कि एक महिला, माँ और इंसान के रूप में देखेंगे, जिनके फैसले इतिहास को आकार देते हैं।

देखना न भूलें हस्तिनापुर के वीर, सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।