रायगढ़, 07 जून (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन अंकुश” के तहत रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है, जो देशभर के सटोरियों को क्रिकेट सट्टा आईडी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा था। आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर ऐसी विशेष वेबसाइट विकसित की थी, जिसमें क्रिकेट मैच की जानकारी टीवी प्रसारण से लगभग पांच सेकेंड पहले उपलब्ध हो जाती थी। इस तकनीक का उपयोग कर सटोरिये बॉल-टू-बॉल सट्टेबाजी में अनुचित लाभ उठा रहे थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह के निर्देशन में ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि रायगढ़ के न्यू शंकरनगर क्षेत्र में रहने वाला एक युवक अपने घर से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन और आईडी निर्माण का काम कर रहा है।
सूचना के आधार पर साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने न्यू शंकरनगर स्थित मकान में दबिश दी। पुलिस को देखते ही एक युवक भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान आदर्श कुमार केशरी (28 वर्ष) निवासी न्यू शंकरनगर, रायगढ़ के रूप में बताई।
जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन और आईडी निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले। पूछताछ में आरोपी ने पूरे नेटवर्क और अपने साथियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं तथा अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी बी.टेक की पढ़ाई कर चुका है और वर्तमान में दिल्ली की एक आईटी कंपनी में कार्यरत है। वर्ष 2025 में उसकी मुलाकात रायपुर और बिहार के दो युवकों से हुई थी, जो नोएडा की आईटी कंपनियों में काम करते हैं। इनके माध्यम से वह ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क से जुड़ा और “Winbigpro” नामक प्लेटफॉर्म के तकनीकी संचालन और प्रबंधन का काम संभालने लगा। इसके बदले उसे कुल कमाई का 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
आरोपी और उसके साथियों ने क्रिकेट मैच प्रसारण में होने वाली तकनीकी देरी का अध्ययन कर एक ऐसी वेबसाइट तैयार की थी, जिसमें मैच की जानकारी सामान्य टीवी प्रसारण से करीब पांच सेकेंड पहले दिखाई देती थी। इस विशेष सुविधा का फायदा उठाकर सटोरिये बॉल-टू-बॉल सट्टेबाजी में बढ़त हासिल करते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह विभिन्न क्रिकेट सट्टा प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों का अध्ययन कर उनसे मिलते-जुलते नए प्लेटफॉर्म तैयार करता था। इसके बाद रायपुर, भिलाई, बिलासपुर समेत देश के कई बड़े शहरों के सटोरियों को सट्टा आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस की निगरानी से बचने के लिए समय-समय पर वेबसाइट के नाम, यूजर आईडी और पासवर्ड भी बदले जाते थे।
गिरोह ने अपने नेटवर्क को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए अलग-अलग टीमें बना रखी थीं। कुछ लोग सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार का काम करते थे, जबकि कुछ आईडी बिक्री और वेबसाइट डेवलपमेंट का कार्य संभालते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपी केवल सट्टा आईडी बेचने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सटोरियों के भुगतान और विड्रॉल से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाता था। पूछताछ में उसने बताया कि वेबसाइट डेवलपमेंट और सट्टा संचालन में इस्तेमाल होने वाला उसका एचपी लैपटॉप दिल्ली स्थित ठिकाने पर रखा हुआ है, जिसकी जानकारी पुलिस को दे दी गई है।
साइबर थाना पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक सैमसंग एस-23 और एक वनप्लस मोबाइल फोन जब्त किया है। जांच में आरोपी का कृत्य छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 4 एवं 7 तथा आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत अपराध पाया गया। इसके बाद साइबर थाना रायगढ़ में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
मामले की विवेचना जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। रायगढ़ पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट के कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा से जुड़े अवैध नेटवर्क पर रायगढ़ पुलिस की लगातार निगरानी है। तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर अपराध को बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

