- 14.52 हेक्टेयर में 36,315 पौधों का रोपण, अब तक 18 लाख से अधिक पौधारोपण के साथ रेक्लैम्ड भूमि पर विकसित हो रहा मानवनिर्मित हरित क्षेत्र
- परसा गाँव में फलदार अमरूद गार्डन की स्थापना
अंबिकापुर, उदयपुर ब्लॉक, 05 जून, 2026: खनन उपरांत भूमि पुनर्स्थापन और हरित आवरण विकास की दिशा में पीईकेबी (परसा ईस्ट एवं केते बासेन) तथा पीसीबी (परसा कोल ब्लॉक) परियोजनाओं द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों के तहत अब तक 18 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। कोयला निकाली जा चुकी (रेक्लैम्ड) भूमि पर चरणबद्ध रूप से विकसित किए गए इन हरित क्षेत्रों ने क्षेत्र में एक संगठित मानवनिर्मित वन का स्वरूप लेना शुरू कर दिया है।
इसी क्रम में, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लॉक में स्थित राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) की पीईकेबी एवं पीसीबी परियोजनाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास को केंद्र में रखते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी सीएसआर गतिविधियों को एक साथ जोड़ा गया।
इस अभियान के अंतर्गत पीईकेबी परियोजना क्षेत्र स्थित हरिहरपुर डंप के समीप 12.48 हेक्टेयर भूमि पर 31,215 पौधों का रोपण किया गया। इसके साथ ही, पीसीबी परियोजना क्षेत्र में 2.04 हेक्टेयर में 5,100 पौधों का रोपण किया गया। इस प्रकार, दोनों परियोजनाओं को मिलाकर 14.52 हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 36,315 पौधे लगाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में पर्यावरणीय प्रयासों के विस्तार को दर्शाता है। वर्ष 2025 में दोनों परियोजनाओं में कुल 27,220 पौधों का रोपण किया गया था।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पीईकेबी एवं पीसीबी परिसरों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पैदल मार्च का आयोजन किया गया। इस दौरान, परियोजना प्रबंधन, अधिकारी, कर्मचारी एवं सहयोगी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। कार्यक्रम का आयोजन परियोजना एवं क्लस्टर प्रबंधन के मार्गदर्शन में किया गया।
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अदाणी समूह की सीएसआर पहल के अंतर्गत परसा गांव में 100 अमरूद के पौधों से एक फलदार गार्डन का निर्माण किया गया है। इसमें वीएनआर वी1 किस्म के अमरूद के पौधे लगाए गए हैं, जो रोपण के लगभग छह महीने के भीतर फल देने योग्य हो जाते हैं। इस पहल से स्थानीय ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर परसा गांव के सरपंच, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, महिला स्व‑सहायता समूहों के सदस्य तथा ग्रामीण उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण आजीविका के लिए उपयोगी बताते हुए इसके संरक्षण और देखभाल का संकल्प लिया। कार्यक्रम में परियोजना की ओर से क्लस्टर प्रमुख सहित पर्यावरण एवं सीएसआर विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त, सीएसआर टीम के समन्वय से 3 एवं 4 जून, 2026 को आसपास के गाँवों में 5,000 फलदार पौधों का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करना, पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना रहा।
पूरे अभियान की योजना स्थानीय जलवायु और भूमि की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई। पौध प्रजातियों का चयन दीर्घकालिक स्थायित्व और क्षेत्रीय उपयुक्तता के आधार पर किया गया। इस आयोजन में परियोजना, पर्यावरण, सीएसआर, उद्यानिकी, खनन एवं प्रशासनिक विभागों का समन्वित सहयोग रहा।
परियोजना प्रबंधन ने इस अवसर पर कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी विभागों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।

