कोरबा 1 मई 2026 ( वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला, जिसे पूरे देश में ‘उर्जाधानी’ के नाम से जाना जाता है, आज एक गंभीर विडंबना का सामना कर रहा है। जहां एक ओर यह जिला बिजली उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी ओर इसी जिले के कई गांव आज भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
मामला पाली ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र में बसे ग्राम सपलवा का है। यहां बिजली विभाग द्वारा लाइन विस्तार का काम तो किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। गांव में महीने भर में सिर्फ 2 से 3 दिन ही बिजली आती है, बाकी समय पूरा गांव अंधेरे में डूबा रहता है। ग्रामीणों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। जहां बिजली नाम मात्र की है, वहीं हर महीने हजारों रुपये के बिजली बिल थमा दिए जाते हैं। यानी ग्रामीणों को बिना सुविधा के ही पूरा भुगतान करना पड़ रहा है। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।
स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब गांव का ट्रांसफॉर्मर पिछले दो महीनों से जला हुआ है। ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा है और न ही समस्या के समाधान की कोई पहल की गई है।सिर्फ सपलवा ही नहीं, बल्कि आसपास के पहाड़ गांव और बारी उमराव गांव जैसे गांव भी वर्षों से इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में बुनियादी सुविधाएं तक लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि जब ‘उर्जाधानी’ कहलाने वाला जिला ही अपने ग्रामीण क्षेत्रों को नियमित बिजली नहीं दे पा रहा, तो विकास के दावों की सच्चाई क्या है? क्या ये दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, या फिर प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगा? ग्रामीण अब जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
