सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पत्रकारिता का बदलता स्वरूप: परंपरा से डिजिटल युग तक का सफर - vedantsamachar.in

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पत्रकारिता का बदलता स्वरूप: परंपरा से डिजिटल युग तक का सफर

राजेश यादव,सारंगढ़, । पान, पानी और पालगी की नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाला सारंगढ़ समय के साथ विकास और परिवर्तन के अनेक पड़ावों का साक्षी रहा है। राजशाही परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े इस नगर में पत्रकारिता का क्षेत्र भी लगातार बदलते दौर के साथ नई दिशा प्राप्त करता रहा है। एक समय था जब सीमित संसाधनों के बावजूद पत्रकारिता जनहित, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकारों का सशक्त माध्यम मानी जाती थी, जबकि आज डिजिटल तकनीक ने इसकी कार्यशैली और स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है।

अविभाजित मध्यप्रदेश और बाद में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात सारंगढ़ की पत्रकारिता को नई पहचान दिलाने में अनेक वरिष्ठ पत्रकारों और समाचार कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनमें यशवंत ठाकुर, भरत अग्रवाल, नूतन थवाईत, ओंकार बानी, अब्बास अली, रामकिशोर दुबे और राजेश यादव सहित कई पत्रकारों के नाम प्रमुखता से लिए जाते हैं। वहीं स्वर्गीय भागीरथी थवाईत, मासूम अली, मुचकुंद तिवारी, विक्रम जायसवाल और भगदन जांगड़े जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने क्षेत्रीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी।

उस दौर में समाचार संकलन, सत्यापन और प्रकाशन की प्रक्रिया बेहद जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ पूरी की जाती थी। पत्रकारों का उद्देश्य केवल समाचार प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और आम जनता की आवाज बनना था। सीमित संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं के अभाव के बावजूद पत्रकारिता में विश्वसनीयता और जनविश्वास सर्वोपरि माना जाता था।

वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया, न्यूज पोर्टल, यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विस्तार ने सूचना के प्रसार को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। अब खबरें कुछ ही क्षणों में लोगों तक पहुंच रही हैं। हालांकि इस बदलाव ने पत्रकारिता को नई संभावनाएं और व्यापक मंच उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इसके साथ खबरों की प्रतिस्पर्धा, त्वरित प्रसारण की होड़ और तथ्यात्मकता बनाए रखने जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं।

वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि पत्रकारिता की मूल भावना निष्पक्षता, तथ्यपरकता और जनसरोकारों से जुड़ी रही है। आधुनिक तकनीक के इस दौर में भी इन मूल्यों को बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की पत्रकारिता का इतिहास गौरवशाली रहा है और नई पीढ़ी के पत्रकार इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों और आधुनिक तकनीक के संतुलित समन्वय से ही इस क्षेत्र का भविष्य और अधिक सशक्त बन सकेगा।