दुर्लभ त्वचा रोग से जूझ रही दंतेवाड़ा की जागेश्वरी, पेड़ की छाल जैसी हो गई त्वचा; AIIMS रायपुर में फिर शुरू हुआ इलाज - vedantsamachar.in

दुर्लभ त्वचा रोग से जूझ रही दंतेवाड़ा की जागेश्वरी, पेड़ की छाल जैसी हो गई त्वचा; AIIMS रायपुर में फिर शुरू हुआ इलाज

रायपुर/दंतेवाड़ा, 16 जून 2026 (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की 14 वर्षीय जागेश्वरी एक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग ‘इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स’ (Ichthyosis Hystrix) से जूझ रही है। इस बीमारी के कारण उसके शरीर की त्वचा पेड़ की छाल की तरह मोटी, सूखी और कांटेदार हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल के बाद जागेश्वरी को एक बार फिर एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।

जानकारी के अनुसार जागेश्वरी के जन्म के लगभग तीन महीने बाद ही उसके पैरों की त्वचा पर छोटे-छोटे कांटों जैसे उभार दिखाई देने लगे थे। शुरुआत में परिवार को बीमारी की गंभीरता और प्रकृति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ग्रामीण परिवेश और जागरूकता की कमी के कारण परिजनों ने इसे किसी तंत्र-मंत्र या बुरी नजर का प्रभाव समझ लिया और विभिन्न स्थानों पर झाड़-फूंक का सहारा लिया। हालांकि इससे कोई लाभ नहीं हुआ और समय के साथ बीमारी लगातार बढ़ती चली गई।

जैसे-जैसे जागेश्वरी बड़ी होती गई, उसकी त्वचा पर मोटी परतें बनने लगीं। शरीर के कई हिस्सों की त्वचा कठोर और खुरदुरी हो गई, जिससे उसे रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। बीमारी के कारण उसका शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हुआ।

जागेश्वरी की मां सुबी बताती हैं कि बेटी जब घर से बाहर खेलने जाती थी तो अन्य बच्चे उसकी त्वचा को देखकर उसका मजाक उड़ाते थे और उसे चिढ़ाते थे। बार-बार होने वाली इस उपेक्षा और सामाजिक भेदभाव के कारण उसने धीरे-धीरे लोगों से मिलना-जुलना और घर से बाहर निकलना कम कर दिया। परिवार के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक रही।

एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग के प्रमुख डॉ. मृत्युंजय सिंह ने बताया कि जागेश्वरी का उपचार वर्ष 2019 में भी एम्स में किया गया था। उस समय उसकी हालत काफी गंभीर थी और लगभग एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज किया गया था। उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया था, लेकिन यह बीमारी ऐसी है जो समय-समय पर दोबारा गंभीर रूप धारण कर सकती है।

डॉ. सिंह के अनुसार, इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स दुनिया की सबसे दुर्लभ त्वचा संबंधी बीमारियों में से एक है। इस रोग में त्वचा अत्यधिक शुष्क होकर मोटी परतों में बदल जाती है और कई स्थानों पर फटने लगती है। त्वचा की सतह पर कांटेदार संरचना विकसित हो जाती है, जिससे मरीज को लगातार असहजता और कई बार दर्द का भी सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन मरीज के जीवन की गुणवत्ता पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, हालांकि नियमित दवाओं, विशेष त्वचा देखभाल और चिकित्सकीय निगरानी के जरिए इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल के बाद जागेश्वरी को दोबारा बेहतर उपचार उपलब्ध होने से परिवार को नई उम्मीद मिली है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार चिकित्सा और उचित देखभाल से उसकी स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।