कोरबा,13 अप्रैल (वेदांत समाचार)। रेल व्यवस्थाओं की लगातार अनदेखी को लेकर अब कोरबा में जन असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शहर के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और श्रमिक नेताओं ने एकजुट होकर रेल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलने के संकेत दिए हैं। साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
कोरबा विकास समिति (रेल) के बैनर तले होटल महाराजा में आयोजित सर्वदलीय बैठक में रेल सेवाओं की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि कोरबा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक जिले के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जो अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है।
बैठक में बताया गया कि कोरबा से चलने वाली ट्रेनों को अक्सर बीच रास्ते घंटों तक रोका जाता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्टेशन पर खड़ी ट्रेनों में कोयले की धूल और गंदगी आम हो गई है। इसके अलावा रेलवे फाटक के बार-बार बंद रहने से शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
एक गंभीर मुद्दा यह भी सामने आया कि कई ट्रेनें कोरबा से आगे जाने के बाद वापस नहीं लौटतीं और बिलासपुर में ही उनका संचालन समाप्त कर दिया जाता है। इससे यात्रियों को अनावश्यक दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। लंबे समय से नई ट्रेनों की मांग की जा रही है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
बैठक में कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि अब चुप बैठने का समय समाप्त हो चुका है। आवश्यकता पड़ने पर सभी लोग सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगे।
इस दौरान भाजपा, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं के साथ-साथ सामाजिक एवं श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो कोरबा में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
