CG Big BREAKING:साइबर ठगी की कोशिश: एमडी बनकर भेजा फर्जी व्हाट्सएप मैसेज, 49.60 लाख ट्रांसफर कराने का दबाव

रायपुर, 13 अप्रैल (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां प्रबंध निदेशक (एमडी) राजेश कुमार शुक्ला के नाम का दुरुपयोग कर अधिकारियों से 49 लाख 60 हजार 801 रुपये ट्रांसफर कराने की कोशिश की गई। हालांकि अधिकारियों की सतर्कता के चलते ठग अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके।

जानकारी के मुताबिक, कंपनी के अधिकारियों को एक फर्जी मोबाइल नंबर 99315-25803 से व्हाट्सएप संदेश भेजा गया। संदेश में खुद को एमडी बताते हुए कहा गया कि वे एक महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी राशि एक निर्दिष्ट बैंक खाते में ट्रांसफर की जाए। मैसेज में बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड और लाभार्थी संस्था का नाम भी दिया गया था, जिससे यह संदेश वास्तविक प्रतीत हो।

साइबर ठगों ने संदेश में जल्दबाजी का माहौल बनाते हुए “तुरंत भुगतान करें” और “मीटिंग में हूं” जैसे शब्दों का उपयोग कर अधिकारियों पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की, जो उनकी सामान्य कार्यप्रणाली मानी जाती है। हालांकि कंपनी के सतर्क अधिकारियों ने बिना जल्दबाजी किए पहले इसकी पुष्टि करने का प्रयास किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड है। इसके बाद तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों से किसी भी प्रकार का वित्तीय निर्देश देना पूरी तरह असंगत और संदिग्ध है, इसलिए ऐसे किसी भी संदेश पर प्रतिक्रिया न दी जाए और बिना पुष्टि के कोई लेन-देन न किया जाए।

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बड़े अधिकारियों के नाम और पद का दुरुपयोग कर संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। वे गोपनीयता और जल्दबाजी का माहौल बनाकर लोगों को भ्रमित करते हैं, जिससे व्यक्ति बिना जांच के निर्णय ले लेता है।

प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या ईमेल से सतर्क रहें, संबंधित नंबर को तुरंत ब्लॉक करें और आवश्यकता होने पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। साथ ही, किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि हमेशा संबंधित अधिकारी के आधिकारिक माध्यम से ही करने की सलाह दी गई है।

इस मामले में समय रहते सच्चाई सामने आने से किसी प्रकार की आर्थिक क्षति नहीं हुई, लेकिन यह घटना डिजिटल युग में सतर्कता की अहमियत को फिर से उजागर करती है।