कोरबा, 20 जुलाई (वेदांत समाचार)। विकास और सुशासन के दावों के बीच कोरबा जिले के पाली विकासखंड से ग्रामीण क्षेत्र की बदहाल बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर सामने आई है। केंवरा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम ईरई में सड़क और पुल के अभाव के कारण ग्रामीणों को एक महिला के शव को बांस की डांडी (अर्थी) पर रखकर करीब दो किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, ईरई गांव निवासी मोतीलाल भुनुवार की पत्नी का कुछ दिन पूर्व निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव से बाहर ले जाना था, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण कोई वाहन वहां नहीं पहुंच सका। मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों ने बांस व लकड़ी की डांडी तैयार की और शव को कंधों पर उठाकर लगभग दो किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचे, जहां से आगे की व्यवस्था की गई।
घटना के दौरान मौजूद किसी ग्रामीण ने पूरी अंतिम यात्रा का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में ग्रामीण बारी-बारी से कंधों पर अर्थी उठाए हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके पीछे महिलाएं और अन्य ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हैं।
बरसात में नाला बन जाता है सबसे बड़ी बाधा
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव और मुख्य सड़क के बीच एक नाला पड़ता है, जिस पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। बारिश के दौरान नाला उफान पर होने से गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। सड़क और पुल के अभाव में सामान्य दिनों में भी आवागमन कठिन बना रहता है, जबकि बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
मरीजों को भी खाट पर ले जाना पड़ता है
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। गांव में किसी के बीमार होने पर मरीजों को खाट या चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, क्योंकि एंबुलेंस और 108 संजीवनी सेवा गांव तक नहीं पहुंच पाती। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
वर्षों से सड़क और पुल निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और वन विभाग से गांव तक सड़क तथा नाले पर पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि वन क्षेत्र का हवाला देकर हर बार उनकी मांग टाल दी जाती है, जबकि गांव के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि यदि आज भी किसी गांव में अंतिम यात्रा के लिए शव को कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ रहा है, तो यह विकास के दावों और ग्रामीण अधोसंरचना की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

