नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को कहा कि वह अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तभी समाप्त करेंगे, जब केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं और कथित पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे या फिर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद उन्हें यह भरोसा दें कि इस मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों, पेपर लीक और अन्य संबंधित मामलों की जिम्मेदारी लेती है, या फिर वह और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का नेतृत्व संसद तक पहुंचकर विभिन्न दलों के सांसदों से इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन प्राप्त करता है, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
वांगचुक ने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से उनका संसद तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता, तो विभिन्न दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यह भरोसा दें कि वे संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।
उन्होंने अपने संदेश में दावा किया कि वह सफदरजंग अस्पताल में “अवैध हिरासत” में हैं, जहां उनकी आवाजाही, बोलने और सभी प्रकार के संचार की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया है। वांगचुक ने अपने बयान के अंत में अस्पताल से ही यह संदेश जारी करने का उल्लेख किया।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोपों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर “चलो संसद” मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का कहना है कि देशभर के छात्र और अभिभावक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इस आदेश के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, विरोध मार्च, जुलूस और प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है।
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित विरोध मार्च के लिए न तो किसी प्रकार की अनुमति मांगी गई है और न ही प्रशासन द्वारा कोई अनुमति दी गई है। पुलिस ने कहा कि केवल जंतर-मंतर पर पूर्व अनुमति प्राप्त निर्धारित विरोध प्रदर्शन ही किए जा सकते हैं। इसके अलावा नई दिल्ली क्षेत्र में किसी भी प्रकार के मार्च, जुलूस या सामूहिक प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी।
संसद सत्र के दौरान इस विरोध प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार या विपक्षी दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या संसद में शिक्षा व्यवस्था एवं परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों पर व्यापक चर्चा होती है।

