गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के जैविक विष्णुभोग चावल की खुशबू पहुंची रायपुर, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की महिला समूहों की सराहना - vedantsamachar.in

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के जैविक विष्णुभोग चावल की खुशबू पहुंची रायपुर, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की महिला समूहों की सराहना

रायपुर, 22 जून (वेदांत समाचार)। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल अब प्रदेश स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे इस नवाचार की गूंज राजधानी रायपुर तक पहुंच गई है। जिले के प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल को जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री Arun Sao अरुण साव को भेंट किया।

यह विशेष चावल जिले के अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा पूरी तरह जैविक पद्धति से तैयार किया गया है। महिला समूहों की इस पहल को ग्रामीण आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कृषि उत्पादों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री को चावल भेंट करते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने जिले में संचालित महिला स्व-सहायता समूहों की विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक और विशिष्ट कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विष्णुभोग धान का जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद गुणवत्ता, शुद्धता और पारंपरिक स्वाद के कारण उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। साथ ही यह प्रयास स्थानीय कृषि परंपराओं को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। समूहों द्वारा उत्पादों की आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं के ऐसे प्रयास आत्मनिर्भर भारत और महिला आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि प्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलती है।

अरुण साव ने महिला समूहों और जिला प्रशासन को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि ऐसे नवाचार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार करेंगे और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को और अधिक सशक्त बनाएंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए शासन भी लगातार प्रयासरत है।

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल आज ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और जैविक खेती का सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं की आजीविका को मजबूत कर रही है, बल्कि जिले की विशिष्ट पहचान को प्रदेश और देशभर में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।