कोरबा, 19 जून 2026 (वेदांत समाचार)। कोरबा जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे स्ट्रीट डॉग्स नसबंदी (स्टरलाइजेशन) अभियान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के बाद पशु प्रेमियों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने अभियान के संचालन और पशुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर चिंता जताई है। आरोप है कि नसबंदी अभियान के तहत संचालित सेंटर में कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है तथा ऑपरेशन के दौरान निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।
जानकारी के अनुसार कोरबा जिले में आवारा कुत्तों के स्टरलाइजेशन अभियान का संचालन स्नेह एनिमल वेलफेयर सोसायटी द्वारा किया जा रहा है। संस्था को इस कार्य का ठेका मिला हुआ है और दर्री क्षेत्र के पास स्थापित सेंटर में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी की जा रही है। हालांकि हाल ही में सामने आए एक वीडियो ने पूरे अभियान की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वायरल वीडियो के आधार पर पशु प्रेमियों का आरोप है कि सेंटर में कुत्तों का ऑपरेशन अव्यवस्थित परिस्थितियों में किया जा रहा है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि प्रशिक्षित और अनुभवी पशु चिकित्सकों की पर्याप्त निगरानी के बजाय अनुभवहीन लोगों से कार्य कराया जा रहा है, जिससे बेजुबान जानवरों के स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और संबंधित आरोपों की आधिकारिक जांच भी नहीं हुई है।
स्थानीय नागरिकों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियां सही पाई जाती हैं तो यह पशु क्रूरता का गंभीर मामला हो सकता है। उनका आरोप है कि नसबंदी प्रक्रिया के दौरान आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल, स्वच्छता मानकों और पशु कल्याण नियमों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति में ऑपरेशन के बाद पशुओं में संक्रमण, गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।
मामले को लेकर पशु प्रेमियों ने जिला प्रशासन, नगर निगम कोरबा और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने पूरे स्टरलाइजेशन सेंटर का निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच कराने तथा वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, ऑपरेशन प्रक्रिया और पशुओं की देखभाल की व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग उठाई है।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने कोरबा कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि स्टरलाइजेशन सेंटर में कितने पंजीकृत पशु चिकित्सक तैनात हैं, ऑपरेशन करने वाले कर्मचारियों की योग्यता क्या है और क्या पशु कल्याण बोर्ड तथा संबंधित विभागों द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से संचालित ऐसे अभियानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए स्टरलाइजेशन सबसे प्रभावी और मानवीय उपायों में से एक माना जाता है। लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, सुरक्षित ऑपरेशन प्रक्रिया और ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल पर निर्भर करती है। यदि इन मानकों की अनदेखी की जाती है तो अभियान का उद्देश्य प्रभावित होने के साथ-साथ पशुओं के जीवन पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
फिलहाल वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस मामले में स्नेह एनिमल वेलफेयर सोसायटी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। बावजूद इसके, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पशु प्रेमियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए ताकि यदि कोई अनियमितता या लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
अब पूरे मामले में जिला प्रशासन, नगर निगम और संबंधित संस्था की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या प्रशासन वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच कराएगा तथा स्टरलाइजेशन अभियान की वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करेगा।

