धमतरी। अपराध अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में धमतरी पुलिस लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय नया रायपुर के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक धमतरी के मार्गदर्शन में गुरुवार को पुलिस कार्यालय धमतरी में नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फिंगर प्रिंट तकनीक, घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और डिजिटल रिकॉर्डिंग की आधुनिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।कार्यशाला में पुलिस मुख्यालय से आए फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ डीएसपी राकेश नरवरे ने जिला NAFIS कार्यालय, MCU/CrPI शाखा एवं अभियोजन कार्यालय का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने जिले के विभिन्न थानों एवं चौकियों से आए विवेचना अधिकारियों को घटनास्थल पर साक्ष्य संरक्षण और फिंगर प्रिंट संकलन की बारीकियों से अवगत कराया।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को चांस प्रिंट के संरक्षण, फिंगर प्रिंट डेवलपमेंट, आदर्श अंगुली चिन्ह पर्णी तैयार करने, अज्ञात मृतकों के चर्म-पोरों को सुरक्षित रखने तथा NAFIS प्रणाली में फिंगर प्रिंट अपलोड करने और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने और फिंगर प्रिंट विकसित करने का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया, जिससे अधिकारियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।डीएसपी राकेश नरवरे ने बताया कि NAFIS तकनीक देशभर के अपराधियों और संदिग्ध व्यक्तियों के फिंगर प्रिंट रिकॉर्ड को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से किसी भी व्यक्ति के फिंगर प्रिंट का राष्ट्रीय स्तर पर त्वरित और ऑनलाइन मिलान संभव हो सकेगा। इससे अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और अपराधों के खुलासे की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी बनेगी।उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों का सुदृढ़ संकलन न केवल जांच की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा बल्कि न्यायालय में मामलों की दोषसिद्धि दर बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया।कार्यक्रम में मौजूद पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में वैज्ञानिक जांच सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने सभी विवेचना अधिकारियों को निर्देशित किया कि घटनास्थल से प्राप्त फिंगर प्रिंट एवं अन्य साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जाए तथा NAFIS प्रणाली का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित जांच से अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार आएगा और अपराधियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाने में मदद मिलेगी।
कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ राकेश नरवरे, डीसीबी प्रभारी सहित जिले के विभिन्न थानों एवं चौकियों से नामांकित विवेचना अधिकारी उपस्थित रहे।धमतरी पुलिस का मानना है कि वैज्ञानिक जांच प्रणाली और आधुनिक तकनीकों का समावेश अपराध नियंत्रण एवं अनुसंधान को नई दिशा देगा। इसी उद्देश्य के साथ पुलिस विभाग लगातार अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

