“ऑफ-स्क्रीन भी वे मुझे पितामह कहते हैं”: सोनी सब के हस्तिनापुर के वीर की युवा कास्ट के साथ अपने खास रिश्ते पर कहते हैं मनीष वाधवा - vedantsamachar.in

“ऑफ-स्क्रीन भी वे मुझे पितामह कहते हैं”: सोनी सब के हस्तिनापुर के वीर की युवा कास्ट के साथ अपने खास रिश्ते पर कहते हैं मनीष वाधवा

मुंबई, 05 जून, 2026: सोनी सब लेकर आ रहा है दर्शकों के लिए एक भव्य पौराणिक गाथा हस्तिनापुर के वीर, जो पांडवों और कौरवों के शुरुआती वर्षों पर केन्द्रित है। यह शो रिश्तों, भावनाओं और उन फैसलों को उजागर करता है, जिन्होंने हस्तिनापुर का भविष्य तय किया। 2 जून से शुरू होकर हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे प्रसारित होने वाला यह शो भावनाओं, कर्तव्य, शक्ति और नियति का अनोखा संगम पेश करेगा। इस भव्य कथा में गंभीरता और ज्ञान लेकर आते हैं अभिनेता मनीष वाधवा, जो भीष्म पितामह का प्रतिष्ठित किरदार निभा रहे हैं। वे हस्तिनापुर के संरक्षक हैं, जो अपनी ताकत, त्याग और अटूट कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते हैं।

कहानी में जहाँ भीष्म पितामह युवा राजकुमारों के मार्गदर्शक हैं, वहीं ऑफ-स्क्रीन भी मनीष वाधवा पांडवों और कौरवों की भूमिका निभाने वाले युवा कलाकारों के लिए एक मेंटर जैसे बन गए हैं। युधिष्ठिर के रूप में अथर खान, भीम के रूप में सुभाष खत्री, अर्जुन के रूप में उर्वा सवालिया, नकुल के रूप में हरित गबानी, सहदेव के रूप में मयंक यादव, दुर्योधन के रूप में अय्युध भानुशाली और दुःशासन के रूप में शौर्य उपाध्याय, सभी युवा कलाकारों का उनके साथ सेट पर बेहद सहज और गर्मजोशी भरा रिश्ता है। दृश्यों और रिहर्सल्स के बीच मनीष अक्सर उन्हें किरदारों की भावनाओं को समझने में मदद करते हैं, संवादों पर मार्गदर्शन देते हैं और पौराणिक कथाओं की बातें साझा करते हैं, ताकि वे शो की दुनिया से गहराई से जुड़ सकें। समय के साथ यह रिश्ता सीखने, हँसी-मज़ाक और सम्मान से भर गया है। युवा कलाकार उनके अनुभव और शांत स्वभाव को देखकर उनसे प्रेरणा लेते हैं और उन्हें एक मार्गदर्शक की तरह मानते हैं। सेट पर उनकी मौजूदगी सभी के लिए ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आती है।

अपने इस रिश्ते पर बात करते हुए, मनीष वाधवा ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि इस सफर के दौरान मुझे एहसास हुआ कि ऑफ-स्क्रीन भी मेरा रिश्ता इन युवा कलाकारों के साथ उसी गर्मजोशी और मार्गदर्शन जैसा हो गया है। मुझे इन बच्चों की सबसे अच्छी बात यह लगती है कि वे कितने उत्सुक और सीखने के लिए तैयार रहते हैं। वे हमेशा ध्यान से देखते हैं, सवाल पूछते हैं और दृश्यों को बेहतर समझने की कोशिश करते हैं, जो इतनी कम उम्र में देखना वाकई शानदार है। दृश्यों के बीच हम काफी समय साथ बिताते हैं, पौराणिक कथाओं पर चर्चा करते हैं, बातें करते हैं और हँसी-मज़ाक करते हैं। दरअसल, ऑफ-स्क्रीन भी अब कई लोग मुझे ‘पितामह’ कहने लगे हैं, जो मेरे लिए बेहद खास है। हमने एक खूबसूरत रिश्ता बनाया है और उनकी ऊर्जा हर दिन सेट को जीवंत बनाए रखती है।”

देखिए हस्तिनापुर के वीर, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।