बदलाव के कारवाँ में संग चलेंगे 'गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स' के दो संस्करणों के विजेता - vedantsamachar.in

बदलाव के कारवाँ में संग चलेंगे ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ के दो संस्करणों के विजेता

  • दो सीज़न के बदलावकर्ताओं के साथ और भी व्यापक होगा ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’

इंदौर, 27 मई, 2026: समाज को बेहतर बनाने वाले लोग अक्सर भीड़ में सबसे शांत दिखाई देते हैं। उनके पास बड़े मंच नहीं होते, लंबी-लंबी बातें नहीं होतीं, लेकिन उनके छोटे-छोटे प्रयास न जाने कितने ही जरूरतमंदों के जीवन में उजियारा कर देते हैं। कोई अपने कीमती समय का हिस्सा निकालकर बच्चों को पढ़ाता है, कोई बचा हुआ भोजन भूखों तक पहुँचाता है, तो कोई प्रकृति को बचाने के लिए अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे लोग सिर्फ समाजसेवी नहीं होते, बल्कि उम्मीद के वे चेहरे होते हैं, जिनकी वजह से दुनिया थोड़ी और बेहतर लगती है। ऐसे ही समाजसेवियों को सम्मान देने वाली पहल ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ अब सिर्फ एक सम्मान समारोह भर नहीं रह गई है, बल्कि समाज में बदलाव लाने वाले लोगों का एक खूबसूरत कारवाँ बनती जा रही है। इसी कड़ी में ‘2030_का_भारत’ द्वारा आयोजित इस पहल के तहत एक विशेष वर्चुअल गेट-टुगेदर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ के पहले और दूसरे संस्करण के सभी विजेता एक साथ जुड़ेंगे। यह ऑनलाइन आयोजन 30 मई, 2026 को सुबह 11 आयोजित होगा, जहाँ देश के अलग-अलग राज्यों से वे चेहरे फिर एक मंच पर दिखाई देंगे, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज में उम्मीद की अलख जगाने का काम किया है।

‘2030_का_भारत’ के फाउंडर डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा, “अक्सर समाज के लिए सबसे अच्छा काम वही लोग करते हैं, जिनके बारे में दुनिया बहुत कम जानती है। ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ ऐसे ही लोगों को सामने लाने की एक कोशिश है। यह वर्चुअल गेट-टुगेदर सिर्फ एक-दूसरे से जुड़ने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन लोगों को भी समाजसेवा की धारा से जोड़ने का एक मंच है, जो चाहते हैं कि वे भी अपनी दिनचर्या से बचने वाले समय को समाजसेवा करके विशेष बनाएँ, क्योंकि जब ऐसे लोग एक-दूसरे की कहानियाँ सुनते हैं, तो बदलाव की ताकत और बढ़ जाती है।”

‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ के पहले संस्करण में शिक्षा और सरप्लस फूड डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में काम करने वाले 8 लोगों को सम्मानित किया गया था। इनमें इंदौर के राजन रानाडे और अमित त्रिवेदी, पटना के रोहित कुमार सिंह, झारखंड के संतोष कुमार पंडा और शबनम खातून, राजस्थान के धर्मवीर जाखड़ और डॉ. सुनील कुमार शर्मा जैसे नाम शामिल रहे। वहीं, लखनऊ के सोमनाथ कश्यप ने भी जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाने की दिशा में सराहनीय काम किया।

इसके बाद दूसरे संस्करण में यह पहल और ज्यादा व्यापक स्तर पर पहुँची। इस बार शिक्षा, सरप्लस फूड डिस्ट्रीब्यूशन और इको वॉरियर जैसी श्रेणियों में 15 बदलावकर्ताओं को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में जबलपुर के पराग दीवान, अयोध्या के एसआई रंजीत यादव, मुजफ्फरपुर के सुमित कुमार, धनबाद के अनिल कुमार सिंह और देहरादून के श्रेय रावत ने अपने प्रयासों से जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने का काम किया। वहीं, सरप्लस फूड डिस्ट्रीब्यूशन श्रेणी में इंदौर के जसप्रीत सिंह छाबड़ा, वाराणसी के रौशन कुमार पटेल, बिहार के रवि शंकर उपाध्याय और झारखंड के विवेक ने भोजन की बर्बादी रोकने और जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए। इसके अलावा, इको वॉरियर श्रेणी में शाजापुर के देवेंद्र परमार, चंदौली के चंद्र प्रकाश सिंह, बाड़मेर के हरीराम, जमशेदपुर के गौरव आनंद, पटना, बिहार की आकांक्षा सिंह और देहरादून, उत्तराखंड की डॉ. हिमानी पुरोहित को सम्मानित किया गया, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता के क्षेत्र में प्रेरणादायक योगदान दिया।

यह सिर्फ एक ऑनलाइन मीटिंग नहीं होगी, बल्कि उन कहानियों का मिलन होगा, जिनमें संघर्ष भी है, सेवा भी और समाज को बेहतर बनाने की सच्ची कोशिश भी। यहाँ वे लोग होंगे, जिन्होंने अपने हिस्से का समय, मेहनत और संवेदनशीलता दूसरों के लिए समर्पित की। कोई नौकरी के बाद बच्चों को पढ़ाता रहा, कोई रात में बचा भोजन इकट्ठा कर भूखों तक पहुँचाता रहा, तो कोई लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाता रहा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ का तीसरा संस्करण बीते दोनों संस्करणों से कहीं ज्यादा व्यापक होने जा रहा है। अब यह पहल देश के और ज्यादा शहरों, कस्बों और गाँवों तक पहुँचेगी, ताकि उन लोगों की कहानियाँ भी सामने आ सकें, जो बिना किसी पहचान की चाह के लगातार समाज के लिए काम कर रहे हैं।

यह आयोजन एक बार फिर यही याद दिलाएगा कि समाज को बदलने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार एक छोटी-सी कोशिश, थोड़ा समय और दूसरों के लिए सोचने की आदत ही सबसे बड़ा बदलाव ले आती है। कुल मिलाकर, ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स’ अब उन लोगों की बुलंद आवाज है, जिनकी पहचान उनके शब्दों से नहीं, बल्कि उनके काम से होती है।