Vaibhav Sooryavanshi: इंग्लैंड में मिल गया वैभव सूर्यवंशी को पहला सबक, लंबा खेलना है तो बदलनी होगी ये आदत - vedantsamachar.in

Vaibhav Sooryavanshi: इंग्लैंड में मिल गया वैभव सूर्यवंशी को पहला सबक, लंबा खेलना है तो बदलनी होगी ये आदत

नई दिल्ली,09 जुलाई : वैभव सूर्यवंशी के इंटरनेशनल करियर की शुरुआत उस तरह की नहीं हो पाई है, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. टीम इंडिया के इस युवा ओपनर ने अपनी पहली ही इंटरनेशनल सीरीज में अपने टैलेंट की झलक दिखाई है लेकिन फिलहाल कोई बड़ी पारी उनके बल्ले से नहीं निकली है. उनको लेकर किसी भी तरह का फैसला देना जल्दबाजी होगी लेकिन पिछले कुछ वक्त में उनकी बैटिंग का एक ऐसा पहलू सामने आ रहा है, जो परेशानी का सबब बन सकता है. ये है बाउंसर के सामने झुकने से परहेज और ये उनके लिए घातक साबित हो सकता है.

आईपीएल 2026 में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में डेब्यू करने का मौका मिला. सिर्फ 15 साल की उम्र में वैभव ने डेब्यू का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. उनको प्लेइंग-11 में शामिल करने की मांग जोर-शोर से हो रही थी और ये आखिरकार हुआ भी. मगर दोनों मैच में वैभ जल्दी ही आउट हो गए. उन्होंने 2-3 छक्के लगाकर दिखाया जरूर कि वो इस स्टेज के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने अपनी एक संभावित कमी भी उजागर कर दी.

असल में नॉटिंघम में खेले गए तीसरे टी20 मैच में वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत तो विस्फोटक की और आते ही 2 छक्के जमा भी दिए. मगर तीसरे ओवर में जैसे ही जोफ्रा आर्चर ने एक शॉर्ट पिच गेंद उनके शरीर की ओर डाली, वैभव ने उस पर हुक शॉट जमाने की कोशिश की. यही उनके लिए घातक साबित हुआ और वो विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए. उस गेंद की रफ्तार करीब 145 किलोमीटर प्रतिघंटा थी और इसके कारण ही वैभव मात खा गए.

IPL वाले स्टाइल से बैटिंग नहीं आसान
यही विकेट वैभव सूर्यवंशी के लिए एक सबक है, जिसे उन्हें जल्द से जल्द अपने खेल में लेकर आना होगा. असल में बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने IPL में तो विस्फोटक गेंदबाजी की और वहां उन्होंने हर तरह की गेंदों को बाउंड्री के पार आसानी से पहुंचाया. मगर IPL में भी कई गेंदबाज उनके खिलाफ शॉर्ट पिच गेंद या बाउंसर का इस्तेमाल कर रहे थे. फर्क ये है कि भारतीय मैदानों की जिन परिस्थितियों में IPL के मैच हुए, वो पूरी तरह बल्लेबाजी के लिए मददगार थे. उनमें ज्यादातर मौकों पर पिच एकदम सपाट थी, जिसके चलते उनमें गेंद बल्ले पर अच्छी हाइट के साथ आसानी से आ रही थी.

थोड़ा झुकोगे तो ही टिकोगे
इसके उलट इंग्लैंड या साउथ अफ्रीका या न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में गेंद में ज्यादा उछाल रहता है. ऐसे में तेज रफ्तार के कारण अक्सर बाउंसर पर पुल या हुक शॉट खेलना इतना आसान नहीं होता. इसके चलते ही टाइमिंग के बिगड़ने और कैच उछलने का खतरा बना रहता है. ऐसे में इन परिस्थितियों में हर बाउंसर पर शॉट के लिए जाना समझदारी भरा फैसला नहीं है.

ऐसी गेंदों के खिलाफ अक्सर परंपरागत क्रिकेट टेक्नीक यानि बाउंसर के सामने झुककर उसे जाने देना कई बार बेहतर विकल्प होता है. किसी भी ओवर में 2 से ज्यादा बाउंसर की इजाजत नहीं होती. ऐसे में अगर इन गेंदों से बच जाएं तो बाकी गेंदों का निशाना बनाकर लंबी या विस्फोटक पारी खेली जा सकती है और यही वैभव को सीखने की जरूरत है.