तेहरान,03 मई। समंदर में अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी लुकाछिपी का खेल चल रहा है। एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। मॉनिटरिंग फर्म ‘टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम’ ने दावा किया है कि ईरान का एक बहुत बड़ा तेल का जहाज अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी को चकमा देकर बाहर निकल गया है। यह जहाज अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहुंच गया है। इस घटना से अमेरिका की पहरेदारी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि समंदर में दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है।
दरअसल, अमेरिका ने ईरान को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए उसके तेल व्यापार पर रोक लगाने की कोशिश की है। इसके लिए अमेरिकी नौसेना ने समंदर में कड़ी नाकेबंदी कर रखी है। लेकिन, ट्रैकिंग फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का एक विशाल जहाज अमेरिका की इस नाकेबंदी को भेदने में सफल रहा है। यह जहाज कोई छोटा-मोटा जहाज नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा है। इस घटना ने यह दिखा दिया है कि ईरान अपने तेल को बेचने के लिए नए-नए और छुपे हुए रास्ते निकाल रहा है।
कितने डॉलर का तेल लेकर निकला ईरानी जहाज?
मॉनिटरिंग फर्म ‘टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम’ के मुताबिक, ईरान का यह जहाज करीब 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर वहां से निकला है।
इस भारी मात्रा में मौजूद तेल की कीमत लगभग 220 मिलियन डॉलर आंकी गई है।
इस विशाल जहाज (वेरी लार्ज क्रूड कैरियर या वीएलसीसी) का संबंध ‘नेशनल इरानियन टैंकर कंपनी’ से बताया जा रहा है।
ट्रैकिंग फर्म ने जानकारी दी है कि इस खास जहाज की पहचान “ह्यूज” (Huge) नाम से की गई है।
कैसे जहाज ने छिपाई अपनी लोकेशन और अब कहां है?
रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज को आखिरी बार करीब डेढ़ हफ्ते पहले श्रीलंका के समुद्री इलाके के पास देखा गया था।
फिलहाल यह विशाल तेल टैंकर लोमबोक स्ट्रेट के रास्ते से होकर रिओ आर्किपेलेगो (द्वीप समूह) की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फर्म ने बताया कि 13 अप्रैल को जब अमेरिकी नौसेना ने नाकेबंदी की घोषणा की थी, तब यह टैंकर ईरान के ही जलक्षेत्र में मौजूद था।
इस जहाज ने 20 मार्च को स्ट्रेट ऑफ मलाका से ईरान के लिए रवाना होने के बाद अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) बंद कर दिया था।
इससे इसकी लोकेशन ट्रैक करना काफी मुश्किल हो गया था।
नाकेबंदी को लेकर अमेरिका और ईरान के क्या हैं दावे?
ईरानी सरकारी मीडिया ने 29 अप्रैल को दावा किया था कि उनके कम से कम 52 जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने में सफल रहे हैं। वहीं, अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि जब से नाकेबंदी शुरू हुई है, तब से उन्होंने ईरान से जुड़े करीब 41 जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि उनकी यह नाकेबंदी काफी असरदार और प्रभावी साबित हो रही है। अमेरिका का कहना है कि इसके कारण ईरान अपना तेल निर्यात करने में असमर्थ हो रहा है और उसे तेल को स्टोर करने या उत्पादन रोकने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
ईरान को अब तक कितना नुकसान
शनिवार को न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस ने कुछ अधिकारियों के हवाले से एक बड़ी खबर प्रकाशित की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की इस समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान को काफी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन के आकलन के मुताबिक, इस नाकेबंदी से ईरान को लगभग 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अगर इसे भारतीय रुपयों में देखा जाए, तो यह नुकसान करीब 456 अरब रुपए (45,600 करोड़ रुपए) के तेल राजस्व का है।
