छुट्टियों में धर्मस्थल जाना, दादी-नानी से बात करना यह हो बच्चों का होमवर्क: विजय चोपड़ा – vedantsamachar.in

छुट्टियों में धर्मस्थल जाना, दादी-नानी से बात करना यह हो बच्चों का होमवर्क: विजय चोपड़ा

बच्चों के बढ़ते एग्रेशन, डिप्रेशन को दूर करने हुई टीचर्स वर्कशॉप

रायपुर 1 मई 2026 ( वेदांत समाचार)। गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को स्कूलों से 55 दिनों का होमवर्क दिया जाता है। बच्चों के इस होमवर्क में नवीनता लाने जैन संवेदना ट्रस्ट ने स्कूली टीचर्स के लिए आदिश्वर जैन उ मा शाला व वर्द्धमान स्कूल की टीचर्स के लिए संयुक्त वर्कशॉप आयोजित की। जिसका विषय रहा- ‘सहेजें अपने विरासत के संस्कारों को।’ 

प्रसिद्ध शिक्षाविद व मोटिवेशनल स्पीकर विजय चोपड़ा ने इस वर्कशॉप में शिक्षकों को मंत्र देते हुए कहा, छुट्टियों में बच्चे समय का सदुपयोग करें व अपनी विरासत के संस्कारों को सहेजें ताकि बच्चों में सहनशीलता, धैर्य, अनुशासन, संस्कार व करुणा जैसे गुणों का विकास हो सके। उन्होंने कहा, बच्चों के गर्मियों की छुट्टियों के होमवर्क में विशेष रूप से धर्मस्थलों में जाने और अपने दादा-दादी, नाना-नानी से बातचीत कर उनके अनुभव से सीखने का प्रोजेक्ट प्रमुख रूप से शामिल किया जाना चाहिए। 

चोपड़ा ने शिक्षकों से 6 प्रमुख बिंदुओं वाला प्रोजेक्ट देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को 55 दिनों के वेकेशन में प्रेक्टिकल कर प्रोजेक्ट लिखकर तैयार करने कहें। जिसमें सबसे पहले अपने दादा-दादी, नाना-नानी अथवा ऐसे वरिष्ठ परिजनों के साथ समय व्यतीत करने और उनके अनुभव व संस्कारों को समझकर उसी अनुसार प्रोजेक्ट बनाने की अनिवार्यता को शामिल किया जाए , इस कॉन्सेप्ट और अधिक स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया, प्रत्येक बच्चे को अपने माता-पिता, बड़े भाई-बहन व परिजनों के साथ अपने धार्मिक स्थल जाना, वहां के आत्मिक अनुभव को साझा करना यह उनके प्रोजेक्ट में शामिल हो। इसके अलावा मोहल्ले के वरिष्ठजनों से परिचय बढ़ाना और उनके अनुभव व्यवहार से सीखना, यह भी उस प्रोजेक्ट का प्रमुख हिस्सा होना चाहिए । 

चोपड़ा ने बच्चों को दिए जाने वाले होमवर्क प्रोजेक्ट में उक्त दो बिंदुओं के अलावा अन्य चार बिंदुओं के बारे में भी शिक्षकों को बताया। जिनमें पहला बिंदु- अपने आसपास के पर्यावरण से जुड़कर जीवन जीना सीखने और फिर उन अनुभवों को प्रोजेक्ट के माध्यम से साझा करने। दूसरा बिंदु- व्यवहार में दया-करुणा का विकास करने इन गुणों को अपने दैनिक आचरण में लाने। तीसरा बिंदु- प्राणियों के प्रति सहयोग की भावना से कार्य करते हुए उसे प्रोजेक्ट में साझा कर औरों के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत करने। उन्होंने कहा प्रोजेक्ट में चौथा बिंदु- परिजनों के साथ प्रेमभाव बढ़ाने दिन में एक समय का भोजन सभी के साथ बैठकर करने व आपस में सार्थक चर्चा करते रहने का भी समावेश हो। 

अन्य स्कूलों में होगी टीचर्स वर्कशॉप
वर्कशॉप की शुरुआत में जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर ने बताया, बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। मोटिवेशनल स्पीकर विजय चोपड़ा ने इस अवसर पर कहा कि संस्कार विरासत में मिलते हैं, बाजार से खरीदे नहीं जा सकते। इसी मूल वाक्य को संजोते हुए अनेक स्कूलों में कार्यशाला आयोजित कर बच्चों को प्रोजेक्ट बनाने होमवर्क दिया जाएगा। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व वीरेन्द्र डागा ने बताया कि छुट्टियों के बाद पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों में से प्रथम, द्वितीय व तृतीय प्रोजेक्ट्स को पुरस्कृत भी किया जाएगा।