भारतीय ज्ञान परंपरा में विकलांग विमर्श पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न – vedantsamachar.in

भारतीय ज्ञान परंपरा में विकलांग विमर्श पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

0.अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् का 20वां अधिवेशन, सकारात्मक सोच पर दिया गया जोर

कोरबा 1 मई 2026 ( वेदांत समाचार)। अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् द्वारा “भारतीय ज्ञान परंपरा में विकलांग विमर्श का पुनर्मूल्यांकन” विषय पर 20वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन शासकीय महाविद्यालय, दीपका (जिला कोरबा) में किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर से आए विद्वानों, प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया और विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. ममता ठाकुर के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने महाविद्यालय द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक एवं सामाजिक प्रयासों की जानकारी दी। संगोष्ठी मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज, बिहार) के मुख्य आतिथ्य तथा न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। कार्यक्रम में डॉ. अर्चना मिश्रा (ज्वाइंट कमिश्नर), मदनमोहन अग्रवाल (राष्ट्रीय महामंत्री) सहित अन्य गणमान्य अतिथि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विकलांगता को सदैव सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा गया है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक सोच के माध्यम से ही पारिवारिक एवं सामाजिक चेतना का विकास संभव है, और इसी उद्देश्य से परिषद् देशभर में राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन कर रही है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार की शोध संगोष्ठियां युवा पीढ़ी के दृष्टिकोण को सकारात्मक दिशा देती हैं और समाज में जागरूकता बढ़ाने में सहायक होती हैं।

संगोष्ठी के चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनका संचालन सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. गजेन्द्र तिवारी एवं डॉ. जे.सी. देवांगन ने किया।
पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामशंकर भारती (झांसी) ने की, जिसमें डॉ. अर्चना मिश्रा, डॉ. पायल लिलहारे निमाड़ी सहित अन्य विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
द्वितीय सत्र डॉ. रजनी प्रभा (पटना) की अध्यक्षता में तथा डॉ. लिप्सा पटेल एवं डॉ. भूपेन्द्र धर दीवान (ओडिशा) के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।
तृतीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने की, जबकि चतुर्थ सत्र डॉ. हर्ष पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।

इस दौरान विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. संजीव कुमार राठौर ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. पायल लिलहारे की कृति का विमोचन कर उनका सम्मान किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

यह संगोष्ठी समाज में विकलांगता के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।