दर्री बैराज हुआ मैला: राखड़ डैम फूटने से 28% बढ़ी गंदगी, पेयजल आपूर्ति प्रभावित – vedantsamachar.in

दर्री बैराज हुआ मैला: राखड़ डैम फूटने से 28% बढ़ी गंदगी, पेयजल आपूर्ति प्रभावित

कोरबा, 21 अप्रैल 2026(वेदांत समाचार)।
कोरबा में दर्री बैराज का पानी एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में आ गया है। एसटीपीएस के झाबू राखड़ डैम फूटने से लाखों टन राख बैराज में समा गई, जिससे जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। सोमवार सुबह हालात संभालने के लिए बैराज का एक गेट खोलकर राखयुक्त पानी नदी में बहाना पड़ा। देर रात भी गेट खोला गया था। पानी में टर्बिडिटी (गंदगी का स्तर) 28 प्रतिशत तक पहुंचने के कारण शहर की पेयजल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्पादन कंपनी के मुख्य अभियंता को जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पर्यावरण विभाग की टीम ने घटना के दूसरे दिन मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।

यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 2 मार्च को भी झाबू राखड़ डैम फूटने पर दो गेट खोलकर 43 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। उस समय सिंचाई विभाग ने उत्पादन कंपनी प्रबंधन पर 18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। लगातार दूसरी बार डैम फूटने की घटना ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रविवार को डैम टूटने के दौरान एक बड़ा हादसा भी हुआ, जिसमें एक्सकेवेटर ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप बह गया। बाद में उसका शव वाहन के नीचे दबा मिला। बताया जा रहा है कि झाबू राखड़ डैम लगभग 11-12 वर्ष पुराना है और हर वर्ष इसके रखरखाव का ठेका दिया जाता है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी शंकर इंजीनियरिंग को सौंपी गई है। इसके बावजूद बार-बार डैम फूटने की घटनाएं लापरवाही की ओर इशारा कर रही हैं।

प्रशासनिक जांच में भी लापरवाही सामने आई है। पूर्व घटना में कार्यपालन अभियंता और सहायक अभियंता को निलंबित किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच दो मुख्य अभियंताओं द्वारा की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दर्री बैराज के कार्यपालन अभियंता एस.एन. साय के अनुसार, बैराज का जलस्तर सामान्यतः 941 मीटर बनाए रखा जाता है। इससे कम होने पर संयंत्र तक पानी नहीं पहुंच पाता, जबकि अधिक होने पर गेट खोलकर पानी छोड़ा जाता है। राख को बहाने के लिए एक गेट को लगभग 6 इंच तक खोला गया। साथ ही, बांगो डैम से अतिरिक्त पानी की मांग की गई, ताकि 10 से 11 घंटे तक पानी छोड़ा जा सके और जलस्तर संतुलित बना रहे।

इस बीच, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप मिरी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार के अधीन सीएसईबी एचटीपीपी के डिंडोलभांटा और झाबू स्थित राखड़ बांधों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उनका कहना है कि बांधों में राख रखने की पर्याप्त जगह नहीं बची है और मिट्टी के अस्थायी मेंड बनाकर राख भरी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष 15 से 30 करोड़ रुपये के कार्य केवल कागजों में दिखाए जाते हैं और फर्जी बिलों के माध्यम से भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

मिरी ने यह भी कहा कि एक ही अधिकारी वर्षों से इन बांधों में पदस्थ हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।