मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा पर दायर याचिका खारिज, बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर उठाए सवाल – vedantsamachar.in

मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा पर दायर याचिका खारिज, बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर उठाए सवाल

नागपुर/मुंबई। मोहन भागवत को प्रदान की गई Z+ सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने खारिज कर दिया है। अदालत ने न केवल याचिका को निरस्त किया बल्कि याचिकाकर्ता की मंशा और इरादों पर भी सवाल उठाए हैं।

मामला नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने संघ प्रमुख को दी जा रही उच्च स्तरीय सुरक्षा पर हो रहे खर्च को लेकर आपत्ति जताई थी। याचिका में दावा किया गया था कि Z+ सुरक्षा पर हर महीने करीब 40 से 45 लाख रुपये का खर्च आता है, जो करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक पंजीकृत संगठन नहीं है, इसलिए उसके प्रमुख को दी जा रही सुरक्षा का खर्च सरकार की बजाय संगठन द्वारा वहन किया जाना चाहिए।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका की गंभीरता और उसके पीछे के उद्देश्य पर संदेह व्यक्त किया और अंततः इसे खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि वर्ष 2023 में मुकेश अंबानी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Z+ सुरक्षा का खर्च स्वयं वहन करने का निर्देश दिया था। इसी आधार पर उन्होंने मांग की थी कि मोहन भागवत की सुरक्षा पर होने वाले खर्च की भरपाई भी संबंधित पक्ष द्वारा की जाए।

गौरतलब है कि मोहन भागवत की सुरक्षा को जून 2015 में बढ़ाकर Z+ श्रेणी में शामिल किया गया था और इसकी जिम्मेदारी सीआईएसएफ को सौंपी गई थी। इससे पहले उनकी सुरक्षा महाराष्ट्र पुलिस के जिम्मे थी। इससे भी पहले वर्ष 2012 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे द्वारा उन्हें Z+ सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया था।

अदालत के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा व्यवस्था यथावत जारी रहेगी और इस संबंध में दायर की गई याचिका को कोई राहत नहीं मिली है।