रायपुर, 03 अगस्त (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने महासमुंद जिले के 132/33 केवी उपकेंद्र सांकरा में 40 एमवीए क्षमता के अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर का सफल ऊर्जीकरण कर दिया है। इसके शुरू होने से उपकेंद्र की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 143 एमवीए हो गई है, जिससे क्षेत्र में ओवरलोड और लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने के साथ लगभग 200 गांवों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल सकेगी।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला की उपस्थिति में नए पावर ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण किया गया। इस दौरान उपकेंद्र परिसर की रिक्त भूमि में पौधारोपण भी किया गया।
सांकरा उपकेंद्र में पहले से 40 एमवीए और 63 एमवीए क्षमता के दो पावर ट्रांसफार्मर स्थापित थे। अब अतिरिक्त 40 एमवीए ट्रांसफार्मर के जुड़ने से उपकेंद्र की कुल क्षमता 143 एमवीए हो गई है। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना को मात्र एक माह 15 दिन में पूरा कर लिया गया।
प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्टेट पावर कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह के मार्गदर्शन में प्रदेश के पारेषण नेटवर्क को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिवासी, वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों तक मजबूत विद्युत अधोसंरचना पहुंचाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। सांकरा उपकेंद्र में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर शुरू होने से उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष पीक लोड सीजन के दौरान सांकरा उपकेंद्र पर लगभग 96 एमवीए तक लोड दर्ज किया गया था। क्षमता सीमित होने के कारण उपभोक्ताओं को ओवरलोड और लो वोल्टेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अब अतिरिक्त ट्रांसफार्मर के चालू होने से इन समस्याओं का समाधान होगा और बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर एवं विश्वसनीय बनेगी।
इस उपकेंद्र से 33 केवी के 9 फीडरों के माध्यम से क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति की जाती है। सांकरा उपकेंद्र को 132 केवी सरायपाली तथा 132 केवी झलप पारेषण लाइनों से विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है। यह क्षेत्र कृषि, कृषि आधारित उद्योगों और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में क्षमता विस्तार का लाभ किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं सभी को मिलेगा।
करीब 4 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने से महासमुंद जिले के लगभग 200 गांवों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा।
कार्यक्रम में मुख्य अभियंता अब्राहम वर्गीश, अतिरिक्त मुख्य अभियंता आर.के. तिवारी, अधीक्षण अभियंता विक्रम मंधान, कार्यपालन अभियंता प्रशांत साहू, विंध्याचल गुप्ता, प्रदीप साहू, गौरव रघुवंशी, सहायक अभियंता राजेंद्र चौहान, लता जगत, नारायण प्रसाद लोधी, अंकुर, दीपक सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

