यूपी, 30 जुलाई। जालौन जिले की उरई नगर पालिका में चर्चित आईएएस और जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही भ्रष्टाचार की जांच करने पहुंचे. बीजेपी सभासदों द्वारा ईओ पर लगाए तानाशाही-भ्रष्टाचार के आरोपों और 29 जुलाई की सार्वजनिक चेतावनी के बाद यह कार्रवाई की गई. बिजली, नजूल, निर्माण और सफाई निरीक्षक कक्ष में ताले लटके होने पर राही ने प्राइवेट एजेंसियों की मदद से दस्तावेजों की स्कैनिंग और जब्ती की सख्त प्रक्रिया शुरू करवाई. इस दौरान उनके आसपास दर्जनों मोबाइल कैमरे थे जिनमें सारा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो रहा था.
यह मामला 10 जून को शुरू हुआ था, जब 12 से अधिक बीजेपी सभासदों ने ईओ पर तानाशाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी थी. इसके बाद 20 जून को सभासदों ने डीएम राजेश कुमार पांडे को ज्ञापन देकर निविदाओं, आउटसोर्सिंग एजेंसियों और अवैध भुगतानों की जांच IAS रिंकू सिंह से कराने की मांग उठाई. एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने ईओ से आवश्यक अभिलेख मांगे थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर पत्र सार्वजनिक कर चेतावनी दी थी कि 29 जुलाई तक रिकॉर्ड न मिलने पर वे स्वयं आकर जब्ती करेंगे. निर्धारित दिन दोपहर दो बजे पहुंचने पर कई विभागों में ताले मिले और कर्मचारी गायब थे, जिससे ईओ के साथ तीखा आमना-सामना हुआ.
इससे पहले भी आईएएस रिंकू सिंह प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में रहे. 25 जुलाई को मुख्यमंत्री द्वारा नवीन तहसील भवन के उद्घाटन के बावजूद उन्हें बैठने के लिए चेंबर आवंटित नहीं हुआ था. इससे आहत होकर 25 जुलाई दोपहर तीन बजे वे फाइलों, दस्तावेजों और अलमारियों से भरे लोडर के साथ नवीन तहसील पहुंचे, लेकिन जगह न मिलने से भीषण गर्मी में बाहर खड़े रहे. चेंबर न मिलने पर उन्होंने रात में भी बाहर रुकने का निर्णय लिया. मामला बढ़ता देख अपर जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पुराने दफ्तर से कामकाज चलाने का आदेश जारी किया. इसके बाद वे सामान वापस लदवाकर कलेक्ट्रेट लौटे. इस घटनाक्रम और नगर पालिका में जांच के दौरान हुई तकरार से प्रशासनिक अमले और जनता के बीच चर्चा तेज है.

