नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक बौद्ध तीर्थ स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। इस उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया है। पीएम मोदी ने यूनेस्को के पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए सारनाथ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भारत की गौरवशाली पहचान बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश के सारनाथ को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया जाना बेहद खुशी और गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जहां से भगवान बुद्ध ने अपने ज्ञान, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दुनिया को दिया था। यह मान्यता भारत की प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत का सम्मान है।
सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के साथ ही यह भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश का यह चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इससे पहले राज्य में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त था
दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की घोषणा की गई। करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यह अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। लंबे समय बाद मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही भारतीय संस्कृति और बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
सारनाथ भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। यहीं भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे बौद्ध धर्म में ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ के नाम से जाना जाता है। अब यूनेस्को की मान्यता मिलने के बाद यह स्थल दुनिया भर के पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

