जीवित को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताकर छीन ली नौकरी, हाई कोर्ट ने कमिश्नर का आदेश किया रद्द - vedantsamachar.in

जीवित को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताकर छीन ली नौकरी, हाई कोर्ट ने कमिश्नर का आदेश किया रद्द

बिलासपुर, 20 जुलाई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत मानते हुए उसकी कोटवार की नौकरी समाप्त कर दी गई। मामला जब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इस गंभीर त्रुटि पर सख्त रुख अपनाते हुए सरगुजा संभाग के कमिश्नर द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया और मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।

हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि कमिश्नर का आदेश गलत तथ्यों पर आधारित था। कोर्ट ने मामले को पुनः सरगुजा कमिश्नर के पास भेजते हुए कानून के अनुसार गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

मामला जशपुर जिले के मनोरा तहसील अंतर्गत ग्राम गजमा का है। यहां के निवासी मरियानुस एक्का को ग्राम पंचायत का कोटवार नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति को सुबोध कुमार तिर्की ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष चुनौती दी थी, लेकिन एसडीएम ने आपत्ति खारिज कर दी।

इसके बाद सुबोध कुमार तिर्की ने सरगुजा कमिश्नर के समक्ष द्वितीय अपील दायर की। सुनवाई के बाद 18 जून 2018 को कमिश्नर ने यह कहते हुए अपील स्वीकार कर ली कि मरियानुस एक्का की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनकी कोटवार पद पर नियुक्ति स्वतः समाप्त मानी जाएगी। इसी आधार पर उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई।

कमिश्नर के इस आदेश को मरियानुस एक्का ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कमिश्नर का आदेश पूरी तरह गलत तथ्यों पर आधारित है, क्योंकि मरियानुस एक्का जीवित हैं और स्वयं अदालत में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि वह जांच कर स्पष्ट करे कि याचिकाकर्ता जीवित है या नहीं। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता केशव गुप्ता ने अदालत को अधिकारियों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि मरियानुस एक्का जीवित हैं।

राज्य शासन की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने सरगुजा कमिश्नर के 18 जून 2018 के आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सरगुजा कमिश्नर के पास भेज दिया है और निर्देश दिया है कि सभी पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार नया फैसला दिया जाए।

हाई कोर्ट ने सभी पक्षकारों को 19 अगस्त 2026 को सरगुजा कमिश्नर के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश भी दिया है। यह मामला सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तथ्यात्मक जांच की आवश्यकता को उजागर करता है।