70 साल पुरानी जमीन पर फर्जीवाड़ा: 19 लाख के फर्जी चेक से जमीन हड़पने की साजिश, चांपा पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला - vedantsamachar.in

70 साल पुरानी जमीन पर फर्जीवाड़ा: 19 लाख के फर्जी चेक से जमीन हड़पने की साजिश, चांपा पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला

जांजगीर-चांपा, 18 जुलाई (वेदांत समाचार)। जिले के चांपा थाना क्षेत्र में करीब 70 साल पुरानी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने की कथित साजिश का बड़ा मामला सामने आया है। राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़, फर्जी मुख्तियारनामा और फर्जी चेक के जरिए करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन की रजिस्ट्री कराने के आरोप में चांपा पुलिस ने संदीप ठाकुर, संतोष यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, चांपा निवासी पुरुषोत्तम सोनी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके दादा गोकुल सोनी के नाम ग्राम चांपा में खसरा नंबर 958 की 5 डिसमिल जमीन वर्ष 1954-55 से दर्ज है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 1985-86 के दौरान तहसील कार्यालय के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने राजस्व रिकॉर्ड में कथित रूप से छेड़छाड़ कर इस जमीन को महासमुंद जिले के मल्दामाल निवासी गोकुल भोई के नाम दर्ज कर दिया।

शिकायत के मुताबिक, इसके बाद संतोष यादव निवासी जगदल्ला (चांपा) और संदीप ठाकुर निवासी जांजगीर ने इस कथित फर्जीवाड़े की साजिश रची। नवंबर-दिसंबर 2025 में दोनों आरोपी महासमुंद स्थित गोकुल भोई के घर पहुंचे और उसे यह कहकर झांसा दिया कि चांपा में उसके नाम 15 डिसमिल जमीन है, जिसके बदले उसे 19 लाख रुपये दिए जाएंगे। गोकुल भोई द्वारा मना करने के बावजूद आरोपियों ने उसे 12 जनवरी 2026 को सारंगढ़ स्थित उप पंजीयक कार्यालय ले जाकर मुख्तियारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार करा लिया।

पुलिस जांच में सामने आया कि इसी मुख्तियारनामा के आधार पर 19 फरवरी 2026 को संतोष यादव ने उक्त जमीन की रजिस्ट्री संदीप ठाकुर के नाम 77 लाख 79 हजार 900 रुपये में करा दी। इसके बदले संदीप ठाकुर ने गोकुल भोई के नाम 19 लाख 22 हजार 201 रुपये का एचडीएफसी बैंक का चेक दिया, लेकिन बैंक से उस राशि का भुगतान नहीं हो सका।

जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। पुलिस द्वारा पूछताछ में गोकुल भोई ने स्पष्ट रूप से बताया कि वह कभी चांपा नहीं गया और न ही उसके नाम वहां कोई जमीन है। इसके अलावा उप पंजीयक कार्यालय में जमा आधार और पैन कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के साथ भी छेड़छाड़ किए जाने का खुलासा हुआ। दस्तावेजों में मूल जन्मतिथि 01 जनवरी 1961 को बदलकर 01 जनवरी 1948 कर दिया गया था।

मामले की राजस्व जांच में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चांपा की जांच में पाया गया कि वर्ष 1957 की बिक्री प्रविष्टि तथा 1957-58 की संशोधन पंजी के पृष्ठ क्रमांक 40 और 41 में कटिंग और मिटाकर फर्जी प्रविष्टि क्रमांक 207 दर्ज की गई थी, जिससे जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया।

प्राथमिक जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार कर छल, कपट और धोखाधड़ी के माध्यम से संपत्ति हड़पने की साजिश के पर्याप्त आधार मिलने पर चांपा पुलिस ने संदीप ठाकुर, संतोष यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है तथा जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने वाले संगठित गिरोहों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस और राजस्व विभाग अब इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।