नई दिल्ली , 18 जुलाई। बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने और उनके लिए फर्जी नागरिकता दस्तावेज तैयार करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि एटीएस की कार्रवाई के बावजूद पश्चिम बंगाल में यह अवैध नेटवर्क सक्रिय रहा और इससे जुड़े कुछ एनजीओ विदेशों से फंडिंग हासिल कर करोड़ों रुपये अन्य खातों में ट्रांसफर कर रहे थे, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
17 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी ईडी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में 17 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई एनजीओ के परिसरों की भी तलाशी ली गई, जहां से बड़ी संख्या में दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कुछ संस्थाएं अब भी विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं। एजेंसी को संदेह है कि इस धनराशि का इस्तेमाल घुसपैठियों को बसाने, फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कराने और अन्य गतिविधियों में किया जा रहा था। बैंकों की भूमिका भी जांच के दायरे में ईडी अब उन बैंकों से भी जवाब मांगेगी, जहां संबंधित एनजीओ के एफसीआरए खाते संचालित किए जा रहे थे। जांच एजेंसी उन छोटे बैंकों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिन पर बिना पर्याप्त केवाईसी प्रक्रिया के कथित तौर पर घुसपैठियों के बैंक खाते खोलने के आरोप हैं।
सूत्रों के अनुसार, एजेंसी विदेशी फंडिंग के पूरे नेटवर्क और धन के इस्तेमाल की विस्तृत जांच कर रही है। यूपी में भी सक्रिय नेटवर्क जांच एजेंसियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भी बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का नेटवर्क गहराई तक फैला हुआ है। विशेष रूप से सहारनपुर का देवबंद इस नेटवर्क के प्रमुख ठिकानों में शामिल बताया गया है। पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश एटीएस ने ऐसे तीन मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इनमें से एक मामले में शामिल 15 आरोपियों को हाल ही में राजधानी की अदालत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। घुसपैठ पर सख्ती की तैयारी राज्य सरकार भी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की योजना पर भी पहले चर्चा हो चुकी है। वहीं, ईडी की मौजूदा जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क पर और सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

