डॉ. देव डॉक्टर के रूप में अस्पताल लौट आए हैं, लेकिन सोनी सब के शो ‘यादें’ में उनका दिल एक कठिन परीक्षा से गुजर रहा है - vedantsamachar.in

डॉ. देव डॉक्टर के रूप में अस्पताल लौट आए हैं, लेकिन सोनी सब के शो ‘यादें’ में उनका दिल एक कठिन परीक्षा से गुजर रहा है

मुंबई: सोनी सब का यादें शो दर्शकों के सामने अस्पताल की पृष्ठभूमि पर आधारित गर्मजोशी, हास्य और दिल छू लेने वाले पलों का बेहतरीन संतुलन पेश करता है। डॉ. देव (इक़बाल खान) अपनी ज़िंदगी को एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए फिर से संवारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब एक भावनात्मक मोड़ उनकी निजी यात्रा को अप्रत्याशित तरीके से बदलने वाला है।

आने वाले एपिसोड्स में, डॉ. सनी (अनुराग शर्मा) बार-बार कोशिश करते हैं कि डॉ. देव को नुकसान पहुँचे और उनके फाइनल इंटरव्यू से पहले दवाइयों का डोज़ बढ़ा दिया जाता है। इसके बावजूद, डॉ. देव इंटरव्यू पास कर लेते हैं और आधिकारिक तौर पर डॉक्टर के रूप में अस्पताल लौट आते हैं। इस प्रकार, उस सफेद कोट को फिर से हासिल करते हैं, जिसने कभी उनकी पहचान बनाई थी। हालाँकि, सफेद कोट वापस पाना उनकी यात्रा का एक अहम् पड़ाव है, लेकिन यह पल तब फीका पड़ जाता है, जब डॉ. सृष्टि (गुलकी जोशी) उन्हें अपनी शादी का निमंत्रण देती हैं और यह स्पष्ट कर देती हैं कि उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है। यह भावनात्मक झटका देव को बदल देता है और वे अपने जज़्बात पीछे छोड़कर खुद का एक मज़बूत और ज़्यादा केंद्रित रूप अपनाने का निर्णय लेते हैं।

क्या डॉ. देव का डॉक्टर के रूप में लौटना उन्हें अपने दिल के टूटने से उबरने में मदद करेगा या फिर डॉ. सृष्टि का आगे बढ़ने का फैसला उनकी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा?

आने वाले ट्रैक पर बात करते हुए, इक़बाल खान ने साझा किया, “मुझे लगता है कि इस ट्रैक को वह तथ्य खास बनाता है, जो कि बहुत ही खूबसूरती से दिखाता है कि ज़िंदगी कैसे एक ही समय में आपको सबसे बड़ी जीत और दिल टूटने का सबसे बड़ा एहसास दिला सकती है। देव के लिए फिर से डॉक्टर बनना सिर्फ इंटरव्यू पास करने या सफेद कोट पहनने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपनी पहचान वापस पाने की बात है।

लेकिन, जैसे ही उसे लगता है कि ज़िंदगी पटरी पर लौट रही है, सृष्टि उसे अपनी शादी का निमंत्रण देती है। वह पल उसकी भावनाओं को पूरी तरह बदल देता है। उसके दिल में अब भी सृष्टि के लिए एहसास हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से उसे बहुत दर्द और निराशा होती है, लेकिन आवेश में प्रतिक्रिया देने के बजाए वह इसे खुद के भीतर ही समेट लेता है। यही वह क्षण है, जहाँ दर्शक उसके व्यक्तित्व में बदलाव देखेंगे। वह कड़वा या रूखा नहीं बनता; बल्कि और मज़बूत, ज़्यादा केंद्रित और भावनात्मक रूप से संयमित हो जाता है।”

सोनी सब पर यादें देखना न भूलें, सोमवार से शनिवार रात 8 बजे।