- सुशासन तिहार में शिकायत के बाद जनपद से संबद्ध किए गए सचिव की फिर पंचायत में पदस्थापना, उठे कई सवाल
कोरबा, 22 जून (वेदांत समाचार)। जिला पंचायत कोरबा द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों की पदस्थापना को लेकर जारी दो अलग-अलग आदेश अब सवालों के घेरे में हैं। महज सात दिनों के भीतर पदस्थापना आदेश में बड़ा बदलाव किए जाने से प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। वहीं भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतों से घिरे सचिवों को कार्रवाई के बजाय नई पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपे जाने से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
जिला पंचायत द्वारा 8 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार सचिव लक्ष्मीनारायण राजपूत को ग्राम पंचायत कनकी से अमलडीहा, गितेंद्र जायसवाल को अमलडीहा से कनकी तथा सरगबुंदिया का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। वहीं सचिव प्रमोद कुमार राठिया को सरगबुंदिया से हटाकर जनपद पंचायत करतला में संबद्ध किया गया था।
लेकिन महज सात दिन बाद 15 जून 2026 को जिला पंचायत ने संशोधित आदेश जारी कर पूरी व्यवस्था बदल दी। नए आदेश के तहत लक्ष्मीनारायण राजपूत को कनकी से अमलडीहा, प्रमोद कुमार राठिया को सरगबुंदिया से कनकी तथा गितेंद्र जायसवाल को अमलडीहा से सरगबुंदिया पदस्थ कर दिया गया। खास बात यह रही कि जिस सचिव को पहले जनपद पंचायत में संबद्ध किया गया था, उसे एक सप्ताह बाद फिर से ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
जानकारी के अनुसार संबंधित पंचायतों के सचिवों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, शराबखोरी, मनमानी कार्यप्रणाली और अन्य शिकायतें विभिन्न स्तरों पर की गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग द्वारा कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाते हुए संबंधित सचिवों को दूसरी पंचायतों में पदस्थ कर दिया गया।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 8 जून को जारी आदेश प्रशासनिक दृष्टि से उचित था तो मात्र सात दिनों के भीतर उसे बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं यदि पहले आदेश में कोई त्रुटि थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। शिकायतों से घिरे सचिवों को नई पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपने के पीछे क्या कारण रहे, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि पंचायतों में सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है तो शिकायतों के निराकरण और जवाबदेही तय करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। अब सभी की निगाहें जिला पंचायत प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में उठ रहे सवालों का क्या जवाब देता है और शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
- सात दिन के भीतर पदस्थापना आदेश बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
- प्रमोद कुमार राठिया को पहले जनपद पंचायत में संबद्ध कर बाद में कनकी क्यों भेजा गया?
- शिकायतों के बावजूद संबंधित सचिवों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या नोटिस जारी करना ही कार्रवाई का विकल्प बन गया है?
- जिन पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन्हें नई पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपने की जवाबदेही कौन लेगा?

