कोरबा,20 जून (वेदांत समाचर)। प्रेम विवाह करने वाले बंजारा समाज के एक दंपती और उनके परिवार को चार वर्षों तक सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने समाज के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ तीन दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। पीड़ित युवक मूल रूप से जशपुर जिले के पत्थलगांव का निवासी है और एक निजी ठेका कंपनी में कार्यरत होने के कारण कोरबा जिले के पोड़ीबहार क्षेत्र में रहता है। युवक ने 26 अगस्त 2022 को रायपुर स्थित आर्य समाज मंदिर में अपनी ही जाति की युवती से विवाह किया था।
युवक का कहना है कि वह कनावत गोत्र से संबंधित है, जबकि उसकी पत्नी तिलावत गोत्र की है। इसके बावजूद समाज के कुछ पदाधिकारियों ने दोनों को एक ही गोत्र का बताकर विवाह का विरोध किया और इसे समाज की परंपराओं के विरुद्ध बताया। आरोप है कि विवाह के तुरंत बाद दंपती और उनके परिवार को समाज से बाहर कर दिया गया। बाद में समाज में पुनः शामिल करने के नाम पर दोनों पक्षों से 11-11 हजार रुपये वसूले गए, लेकिन बहिष्कार समाप्त नहीं किया गया। पीड़ित के अनुसार, जब परिवार ने समाज में दोबारा स्वीकार किए जाने की गुहार लगाई तो उनसे दो लाख रुपये का जुर्माना मांगा गया। यह राशि जमा करने के बावजूद उन्हें सामाजिक मान्यता नहीं मिली।
इसके बाद तीन लाख रुपये और देने की मांग भी की गई। मामले में मार्च 2024 तक तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव की भूमिका सामने आई है। अप्रैल 2024 में नए पदाधिकारियों ने कार्यभार संभाला, लेकिन पीड़ित दंपती का आरोप है कि उन्होंने भी सामाजिक बहिष्कार खत्म करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। पीड़ित ने पहले सिविल लाइन थाना, कोरबा में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अधिवक्ता प्रिंस अग्रवाल के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद दायर किया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने सिविल लाइन थाना पुलिस को समाज के चार पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा तीन दिनों के भीतर अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

