मुंबई। अपनी दमदार एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीतने के लिए मशहूर, क्रांति प्रकाश झा ने ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘संकल्प’ और दर्शकों की पसंदीदा क्राइम ड्रामा सीरीज़ ‘रक्तांचल’ जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ अपनी एक खास पहचान बनाई है। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने जमीन से जुड़े और रिलेटेबल किरदारों को निभाने के लिए काफी नाम कमाया है, और अपनी सादगी व स्क्रीन प्रेजेंस के लिए खूब तारीफें बटोरी हैं। हाल ही में, क्रांति ने बिहार से जुड़े स्टीरियोटाइप्स (रूढ़िवादी सोच) पर खुलकर बात की और बताया कि जैसे ही लोगों को पता चलता है कि वह कहाँ से हैं, तो उनका नजरिया कैसे बदल जाता है। अपने अनुभवों को शेयर करते हुए, एक्टर ने उन धारणाओं के बारे में बात की जो आज भी क्षेत्रीय पहचान के साथ जुड़ी हुई हैं और यह भी बताया कि ये चीजें लोगों को देखने के तरीके को कैसे प्रभावित करती हैं।
इसी बारे में बात करते हुए क्रांति प्रकाश झा ने कहा, “दिक्कत हमारे साथ नहीं है, हमारी पहचान के साथ है। हम चाहे कहीं भी चले जाएं, कुछ भी कर लें, जैसे ही सामने वाले को पता चलता है कि आप बिहार से हैं, वह थोड़ा असभ्य हो जाता है। कई बार लोगों ने मुझसे कहा है कि तुम बिहारी जैसे नहीं लगते। मुझे आज तक समझ नहीं आया कि एक बिहारी कैसा दिखता है।” अपनी इन बेबाक बातों के जरिए एक्टर ने इस बात पर रोशनी डाली कि कैसे किसी व्यक्ति को जानने से बहुत पहले ही स्टीरियोटाइप्स लोगों के नजरिए को तय कर देते हैं। उनके ये कमेंट्स पहचान से जुड़ी एक बड़ी बहस और समाज में आज भी मौजूद पुरानी सोच से आगे बढ़ने की जरूरत को दिखाते हैं।
क्रांति की इन बातों ने बहुत से लोगों को प्रभावित किया है, खासकर ऐसे समय में जब देश भर में रीजनल कहानियों, कल्चर्स और आवाजों को बड़ी पहचान मिल रही है। एक “बिहारी” को कैसा दिखना चाहिए, इस पर सवाल उठाकर वह उन संकीर्ण परिभाषाओं को चुनौती देते हैं जो अक्सर पूरे समुदाय पर थोप दी जाती हैं। वहीं, अगर प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें, तो क्रांति प्रकाश झा अपने सबसे ज्यादा अवेटेड प्रोजेक्ट्स में से एक ‘रक्तांचल 3’ के लिए तैयारी कर रहे हैं, और दर्शक इस पॉपुलर क्राइम ड्रामा फ्रेंचाइजी में उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

