नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बाद बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़े उत्तरपुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन के सभी महत्वपूर्ण डाटा को निजी कंपनी के सर्वर से हटाकर अपने नियंत्रण वाले सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया और डाटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, डाटा को अपने सर्वरों पर स्थानांतरित करने के बावजूद सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैनिंग का कार्य हैदराबाद स्थित कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड को सौंपे रखने का निर्णय लिया है। बोर्ड का कहना है कि कंपनी के पास बड़े स्तर पर स्कैनिंग कार्य का अनुभव है और वह शेष प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा कर सकती है।
विवाद तब सामने आया जब 12वीं कक्षा के छात्र तनिष्क वत्स ने आरोप लगाया कि परिणाम घोषित होने के बाद उसे जो मार्कशीट प्राप्त हुई, उसमें विषयवार अंक दर्ज नहीं थे। इसके बाद छात्र के परिवार ने पुनर्मूल्यांकन के लिए छह विषयों की स्कैन की गई उत्तरपुस्तिकाओं की मांग की, लेकिन उन्हें केवल पांच विषयों की कापियां उपलब्ध कराई गईं। जीव विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिका उपलब्ध नहीं होने से मामला और गंभीर हो गया।
बाद में सीबीएसई ने छात्र को गायब उत्तरपुस्तिका उपलब्ध कराई और स्पष्ट किया कि संशोधित मार्कशीट परिणाम घोषित होने के पांच दिन बाद, 18 मई को जारी कर दी गई थी। बोर्ड के अनुसार अब छात्र की सभी शिकायतों का समाधान कर लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की सुरक्षा और तकनीकी खामियों की जांच के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली। इसके तहत आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों को सिस्टम की सुरक्षा ऑडिट और तकनीकी मूल्यांकन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के विशेषज्ञ भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे।
जांच के दौरान यह पाया गया कि ओएसएम प्लेटफॉर्म में कुछ तकनीकी कमजोरियां मौजूद थीं, जिन्हें सुधारने की आवश्यकता थी। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने प्लेटफॉर्म के कोड की विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक संशोधन किए। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, अब उत्तरपुस्तिकाओं और उनसे संबंधित सभी रिकॉर्ड का डाटा पूरी तरह सीबीएसई के नियंत्रण वाले सर्वरों पर सुरक्षित रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, ओएसएम प्रणाली को लागू करने से पहले और बाद में पांच अलग-अलग चरणों में सुरक्षा परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में संभावित साइबर खतरों और तकनीकी खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया गया, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।
सीबीएसई अधिकारियों ने बताया कि कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड ने पहले लगभग 40 करोड़ पृष्ठों की स्कैनिंग का कार्य किया था। इनमें से करीब 30 हजार पृष्ठों में तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं। वर्तमान में केवल विवादित या प्रभावित उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम शेष है, जिसे कंपनी आसानी से पूरा कर सकती है। इसी कारण बोर्ड ने कंपनी को प्रक्रिया से बाहर नहीं किया है।
इस बीच मामला केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। सऊदी अरब में परीक्षा देने वाले एक छात्र ने भी दावा किया है कि उसे ऐसी मार्कशीट प्राप्त हुई जिसमें विषयवार अंक दर्ज नहीं थे। यह मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है और इस पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
सीबीएसई का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को परिणाम, पुनर्मूल्यांकन और उत्तरपुस्तिकाओं से संबंधित किसी भी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े।

