कोरबा। जिले के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत जटगा रेंज में हाथियों का आतंक लगातार जारी है। बीती रात हाथियों के एक बड़े दल से अलग हुए 11 हाथियों ने बासीन सेक्टर के खाड़ीपारा गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने किसानों की खड़ी फसलों को रौंद दिया, खेतों की मेड़ें तोड़ दीं और एक मकान की बाउंड्री वॉल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल बना रहा और ग्रामीण रातभर जागकर अपनी सुरक्षा करते रहे।
जानकारी के अनुसार, जटगा रेंज क्षेत्र में इन दिनों लगभग 45 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें से करीब 40 हाथियों का एक बड़ा दल बासीन सेक्टर के जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। इसी दल से अलग हुए 11 हाथी देर रात लगभग 12 बजे खाड़ीपारा गांव पहुंच गए। गांव के किनारे स्थित खेतों में घुसकर हाथियों ने धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। किसानों की मेहनत से तैयार फसल कुछ ही देर में बर्बाद हो गई।ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने खेतों में लगी फसल को खाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रौंद डाला। इसके अलावा खेतों की मेड़ें भी तोड़ दीं, जिससे कृषि भूमि को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा है। हाथियों का दल यहीं नहीं रुका, बल्कि एक किसान की बाड़ी में घुसकर वहां लगे केले के पेड़ों और सब्जियों को भी नष्ट कर दिया। इससे प्रभावित किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

उत्पात के दौरान हाथियों ने एक मकान की बाउंड्री वॉल को भी धक्का मारकर गिरा दिया। रात के सन्नाटे में हाथियों की चिंघाड़ और उनकी गतिविधियों से गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण भय के कारण अपने घरों से बाहर नहीं निकल सके और पूरी रात सतर्कता के साथ बिताई।घटना की सूचना मिलने के बाद बुधवार सुबह जटगा रेंज का वन विभाग अमला मौके पर पहुंचा। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया। रेंजर के नेतृत्व में टीम ने पंचनामा तैयार किया और प्रभावित किसानों से आवेदन प्राप्त कर मुआवजा प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि फसल और संपत्ति को हुए नुकसान का मूल्यांकन कर शासन के नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।वन विभाग के अनुसार, जटगा रेंज और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। बासीन सेक्टर में सक्रिय 40 हाथियों के बड़े दल के अलावा 5 हाथियों का एक अन्य झुंड भी आसपास के जंगलों में मौजूद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों के प्रवेश की आशंका बनी हुई है।

हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। ट्रैकर दल जीपीएस तकनीक के माध्यम से हाथियों की लोकेशन पर नजर रख रहा है और समय-समय पर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। गांवों में मुनादी कर लोगों को रात के समय जंगल या सुनसान क्षेत्रों में न जाने, अकेले बाहर नहीं निकलने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।वन अधिकारियों का कहना है कि महुआ तथा धान जैसी खाद्य सामग्री की उपलब्धता के कारण हाथी जंगल से निकलकर गांवों और खेतों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
यही वजह है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से बासीन, जटगा, खाड़ीपारा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और तत्काल वन अमले को जानकारी दें, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। फिलहाल हाथियों का दल वापस जटगा के जंगल क्षेत्र की ओर लौट गया है, लेकिन क्षेत्र में खतरा अभी भी बना हुआ है।

