रायपुर, 03 जून (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में कृषि को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए किसानों के साथ संवाद करते हुए कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीकों, ड्रोन तकनीक, नैनो उर्वरकों, जैविक खेती और फसल विविधीकरण को अपनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती-किसानी तथा ग्रामीण जीवन से जुड़े रहे हैं। इसी कारण किसानों की समस्याओं, चुनौतियों और जरूरतों को करीब से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर रहती थी और संसाधनों की कमी के कारण किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन आज तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक पद्धतियों के कारण कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान गांव-गांव पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि सरकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव किसानों के जीवन में दिखाई दे रहा है। किसानों के चेहरे पर बढ़ता आत्मविश्वास और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार ही सरकार की नीतियों की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद ‘ड्रोन दीदियों’ से भी चर्चा की और कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव तेजी से, कम लागत में और अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। इससे न केवल खेती आधुनिक बन रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उर्वरक कृषि क्षेत्र का भविष्य हैं। इनके उपयोग से उर्वरकों की खपत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ने की अपील की।
खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक एवं बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
किसान संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। बदलते समय के अनुरूप किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी, जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरागत पेशा नहीं, बल्कि आधुनिक व्यवसाय और उद्यम के रूप में देख रहा है। यह बदलाव कृषि क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन प्रशिक्षण, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम के अंत में किसानों से नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनेंगी। सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त करने के लिए किसानों को समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसान आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनेंगे।

