कोरबा, 03 जून (वेदांत समाचार)। कोयला उद्योग के मजदूरों के 11वें वेतन समझौते की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो रही है, जबकि 1 जुलाई 2026 से 12वां वेतनमान लागू होना है। इसके बावजूद अब तक कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा 12वें वेतन समझौते के लिए आवश्यक जेबीसीसीआई (Joint Bipartite Committee for the Coal Industry) समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू नहीं किए जाने पर श्रमिक संगठनों में चिंता बढ़ रही है।
इंडियन माइंस वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपेश मिश्रा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कोल इंडिया को नियमानुसार 30 जून से पहले जेबीसीसीआई समिति का गठन कर लेना चाहिए, ताकि 12वें वेतन समझौते की वार्ता समय पर प्रारंभ हो सके। उन्होंने कहा कि अभी तक विभिन्न श्रमिक संगठनों से प्रतिनिधियों की सूची भी नहीं मांगी गई है, जिससे समझौते में विलंब की आशंका बढ़ गई है।
मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2010 में कोल इंडिया ने अपना पहला आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक निर्गम) जारी किया था, जिसके माध्यम से भारत सरकार ने कंपनी की कुल चुकता पूंजी का 10 प्रतिशत हिस्सा बेचकर लगभग 15,200 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके बाद 4 नवंबर 2010 को कोल इंडिया नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध हुई थी।
उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कोल इंडिया भारतीय शेयर बाजार में एक मजबूत और प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के रूप में स्थापित हुई है। ऐसे में कंपनी को अपनी सभी वैधानिक एवं वित्तीय देनदारियों का समय पर निर्वहन करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी सूचीबद्ध कंपनी द्वारा अपनी देनदारियों या दायित्वों के निर्वहन में लगातार विलंब किया जाता है, तो नियामकीय स्तर पर उसके प्रति कठोर रुख अपनाया जा सकता है।
दीपेश मिश्रा ने कहा कि कोल इंडिया की साख और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि 30 जून से पहले जेबीसीसीआई समिति का गठन कर 12वें वेतन समझौते की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। इससे लाखों कोयला मजदूरों को समय पर नया वेतनमान मिल सकेगा और कंपनी भी अपने दायित्वों के निर्वहन की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि कोल इंडिया प्रबंधन श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही आवश्यक पहल करेगा, जिससे वेतन समझौते को समयबद्ध तरीके से संपन्न कराया जा सके।

