राजपुर विवाद के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार-नायब तहसीलदार हड़ताल पर, आमजन के काम प्रभावित - vedantsamachar.in

राजपुर विवाद के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार-नायब तहसीलदार हड़ताल पर, आमजन के काम प्रभावित

सारंगढ़। सरगुजा जिले के राजपुर तहसील में नायब तहसीलदार तुषार मानिक और क्षेत्रीय भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के बीच हुए विवाद के बाद प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए हैं। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के आह्वान पर मंगलवार से प्रदेशव्यापी कामबंद-कलमबंद हड़ताल और धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है। अधिकारियों की इस हड़ताल का असर अब आम लोगों पर भी दिखाई देने लगा है।

संघ की ओर से राजपुर में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले में कार्रवाई तथा दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजपुर तहसील में किसी मामले को लेकर विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच विवाद हुआ था। नायब तहसीलदार ने विधायक पर दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप लगाया है। घटना के बाद से प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों में नाराजगी है। इससे पहले संघ द्वारा सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की गई थी। संघ का आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में भी तहसीलदार और नायब तहसीलदार धरने पर बैठ गए हैं। इस संबंध में सारंगढ़ तहसीलदार एवं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के सदस्य एन.के. सिन्हा ने कहा कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार ऐसे अधिकारी हैं जो बिना किसी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के सीधे आम जनता से जुड़े रहते हैं और उनके कार्यों का निराकरण करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजपुर की घटना में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और गिरफ्तारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल भी गरमा दिया है। चूंकि मामला सत्तारूढ़ दल के विधायक से जुड़ा है, इसलिए विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार से निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

हड़ताल का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। तहसील कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है तथा पक्षकारों को केवल अगली तारीख दी जा रही है। इसके अलावा नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होती है, जिनकी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। किसानों से जुड़े कई राजस्व कार्यों तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं पर भी हड़ताल का असर पड़ने लगा है।

प्रदेशभर में चल रहे इस आंदोलन के कारण राजस्व व्यवस्था आंशिक रूप से प्रभावित हुई है और अब सभी की नजर शासन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हुई है।